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सिस्टर शिवानी के पेरेंटिंग टिप्स: बच्चों को डांट नहीं, सकारात्मक माहौल और भरोसा दें

बच्चों की परवरिश और पारिवारिक रिश्तों को लेकर ब्रह्माकुमारीज़ की मोटिवेशनल स्पीकर सिस्टर शिवानी समय-समय पर ऐसे विचार साझा करती हैं, जो माता-पिता को बेहतर पेरेंटिंग की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। उनके अनुसार, बच्चों के साथ संवाद, सकारात्मक माहौल और विश्वास का रिश्ता उनकी सफलता और व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।

‘बच्चे पढ़ते नहीं’ कहना बंद करें

सिस्टर शिवानी का कहना है कि कई घरों में बार-बार यह कहा जाता है कि “बच्चे पढ़ते नहीं हैं।” धीरे-धीरे यह बात बच्चे के मन में भी बैठ जाती है और वह खुद को पढ़ाई में कमजोर मानने लगता है।

उनका कहना है कि बच्चों के सामने नकारात्मक बातें दोहराने के बजाय सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि माता-पिता बच्चे की एकाग्रता, क्षमता और मेहनत पर विश्वास जताते हैं, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होता है।

दोस्त बनें, लेकिन पेरेंट्स की भूमिका न भूलें

सिस्टर शिवानी के मुताबिक, बच्चे के कई दोस्त हो सकते हैं, लेकिन माता-पिता का स्थान कोई नहीं ले सकता। इसलिए बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना अच्छी बात है, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों और मर्यादाओं को नहीं भूलना चाहिए।

उनका मानना है कि माता-पिता का काम केवल दोस्त बनना नहीं, बल्कि बच्चों को सही-गलत का अंतर समझाना, आवश्यक सीमाएं तय करना और सही दिशा देना भी है।

बच्चे बातें छिपाने क्यों लगते हैं?

सिस्टर शिवानी बताती हैं कि छोटे बच्चे अपनी हर बात माता-पिता से साझा करते हैं, लेकिन बड़े होने पर कई बच्चे बातें छिपाने लगते हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जब बच्चे अपनी गलती या अनुभव साझा करते हैं, तो कई बार उन्हें डांट, आलोचना या अस्वीकार का सामना करना पड़ता है।

ऐसे अनुभवों के बाद बच्चे धीरे-धीरे अपनी बातें बताना कम कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता पहले बच्चे की बात पूरी शांति से सुनें और तुरंत उसे जज करने या डांटने से बचें।

भरोसे का माहौल बनाना जरूरी

सिस्टर शिवानी का कहना है कि बच्चा तभी खुलकर अपनी बातें साझा करेगा, जब उसे भरोसा होगा कि उसकी बात सुनी जाएगी और उसे बिना वजह जज नहीं किया जाएगा।

यदि बच्चा अपनी गलती स्वीकार करते हुए खुद माता-पिता के पास आता है, तो सबसे पहले उसकी ईमानदारी की सराहना करनी चाहिए। इसके बाद प्यार और समझदारी के साथ उसे सही रास्ता दिखाना चाहिए।

क्या है सीख?

सिस्टर शिवानी के अनुसार, बेहतर पेरेंटिंग का आधार सकारात्मक सोच, खुला संवाद, भरोसा और अनुशासन का संतुलन है। यदि माता-पिता बच्चों को स्वीकार करने वाला माहौल देंगे और उनकी खूबियों पर विश्वास जताएंगे, तो बच्चे अधिक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और खुले विचारों वाले बनेंगे।

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