कभी बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अभाव से जूझने वाला सोनभद्र और आसपास का जनजातीय क्षेत्र अब महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण उद्यमिता का नया मॉडल बनकर उभर रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने की नीति ने आदिवासी महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब महुआ, रागी, सांवा और अलसी जैसे पारंपरिक व पौष्टिक उत्पादों से सफल कारोबार कर रही हैं। वे रागी मिलेट लड्डू, अलसी लड्डू, मिलेट कुकीज, बिस्किट और नमकीन जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रही हैं, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
सोनभद्र की मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी के अनुसार, पहले यह क्षेत्र सीमित रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझता था।
लेकिन सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच के बाद अब गांवों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तेजी से बढ़ी है और उनके उत्पाद स्थानीय बाजार से बाहर भी पहचान बना रहे हैं।
विकास खंड घोरावल के दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 15 से अधिक महिलाएं मिलेट आधारित खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। समूह हर महीने करीब 40 से 50 हजार रुपये के उत्पाद बेचता है, जिससे प्रत्येक महिला को सालाना लगभग एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है।
वहीं, म्योरपुर विकास खंड के लिलासी गांव में खुशबू आजीविका स्वयं सहायता समूह की 14 महिलाएं महुआ के लड्डू और सांवा जैसे पारंपरिक उत्पाद तैयार कर रही हैं।
समूह की सदस्य सुनीता देवी के अनुसार, अब उनके उत्पादों की मांग स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं।
इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप जनजातीय क्षेत्रों की महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं।
