रिपोर्ट :- ममता भारद्वाज
आगरा। ताजमहल को तेजोमहालय शिव मंदिर बताते हुए सावन में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की अनुमति की मांग को लेकर दायर वाद में सुनवाई हुई। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सप्तम, न्यायाधीश रजत शुक्ला की अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पक्षकार बनने की अर्जी देने वाले सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी के अधिवक्ता रहीसउद्दीन उपस्थित नहीं हुए।

अदालत ने कहा कि मामला पहली बार इस न्यायालय में स्थानांतरित होकर आया है। ऐसे में सेक्शन 89ए जनरल रूल्स सिविल के तहत सुनवाई की जाएगी। विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता को सूचना देने के लिए समय देते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
इससे पहले मामला लघुवाद न्यायालय में चल रहा था। केस अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सप्तम की अदालत में स्थानांतरित होने के कारण पिछली सुनवाई नहीं हो सकी थी।
गौरतलब है कि योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष और हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने ताजमहल को तेजोमहालय शिव मंदिर बताते हुए सावन में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और अन्य हिंदू त्योहारों पर पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग को लेकर 23 जुलाई 2024 को वाद दाखिल किया था। मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीक्षण पुरातत्वविद और भारत संघ को प्रतिवादी बनाया गया है।
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर और अधिवक्ता झम्मन सिंह रघुवंशी पैरवी कर रहे हैं। वहीं, सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी की ओर से पक्षकार बनने की अर्जी दी गई है।
कुंवर अजय तोमर ने दावा किया कि उनके पास मामले से जुड़े ठोस साक्ष्य हैं और वह ताजमहल में जलाभिषेक व पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग को लेकर अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सावन के चार सोमवार को हिंदुओं के लिए ताजमहल में पूजा की अनुमति मिलनी चाहिए।
वादी के अनुसार, ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय शिव मंदिर है। हालांकि, यह दावा ऐतिहासिक रूप से विवादित है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण समेत मुख्यधारा के ऐतिहासिक अभिलेख ताजमहल को मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा बताते हैं।
