प्रदेश में निरक्षरता समाप्त करने के लिए सरकार ने उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के 10 लाख लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान में महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसमें कुल लाभार्थियों में 75 प्रतिशत महिलाएं और 25 प्रतिशत पुरुष शामिल होंगे।
असाक्षर लोगों की पहचान के लिए एनआईएलपी (न्यू इंडिया लिट्रेसी प्रोग्राम) सर्वे ऐप के माध्यम से सर्वे कराया जाएगा, जिसे सितंबर तक पूरा करना अनिवार्य किया गया है। सर्वे का कार्य परिषदीय विद्यालयों के शिक्षामित्रों को सौंपा गया है।
इस अभियान में कक्षा पांच से ऊपर के छात्र, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक, बीएड छात्र, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी वालंटियर के रूप में भाग लेंगे। हालांकि, इन स्वयंसेवकों को किसी प्रकार का मानदेय नहीं दिया जाएगा।
सभी प्रतिभागियों को पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक सर्वेयर को चार से पांच असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। चयनित लोगों को परीक्षा से पहले 200 घंटे की कक्षाएं दी जाएंगी, जिसमें पहले असफल हो चुके लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
साक्षरता की जांच के लिए सितंबर और मार्च में परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें सफल अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को प्रभावी और सख्ती से लागू किया जाए।
