लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध और भू-उपयोग के विपरीत बने निर्माणों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आवास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्रों और 72 विनियमित क्षेत्रों में 31 मार्च तक किए गए निर्माणों की समीक्षा की जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार, भू-उपयोग के विपरीत ग्रीन बेल्ट में बने 200 वर्गमीटर तक के भवनों को निर्धारित शर्तों के साथ वैध माना जाएगा। हालांकि इससे बड़े क्षेत्रफल पर बने निर्माणों को अवैध मानते हुए उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण सहित अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई निर्माण तालाब, नाला, सड़क, राजस्व भूमि या अन्य सरकारी जमीन पर किया गया है, तो उसे किसी भी स्थिति में वैध नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में नक्शा स्वीकृत करने वाले जिला पंचायत के अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने लोगों को राहत देते हुए भू-उपयोग परिवर्तन (कन्वर्जन) शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट देने का फैसला किया है। ग्रीन बेल्ट को छोड़कर अन्य श्रेणियों में भू-उपयोग के विपरीत बने निर्माणों को निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद नियमित किया जा सकेगा।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, जिला पंचायतों द्वारा 31 मार्च तक स्वीकृत सभी मानचित्र 15 दिनों के भीतर संबंधित विकास प्राधिकरणों को सौंपने होंगे। विकास प्राधिकरण भवन उपविधियों के तहत उनकी जांच करेंगे और मानक पूरे होने पर उनका पंजीकरण किया जाएगा।
प्रदेश के 17 नगर निगमों समेत 762 नगरीय निकायों में से अभी केवल लगभग 200 क्षेत्रों के ही मास्टर प्लान तैयार हैं। ऐसे में सरकार ने शेष क्षेत्रों के मास्टर प्लान छह महीने के भीतर तैयार करने का निर्देश दिया है।
जब तक नए मास्टर प्लान तैयार नहीं हो जाते, तब तक मास्टर प्लान से बाहर के क्षेत्रों में नक्शा स्वीकृत करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाएगी। आबादी क्षेत्र में बने निर्माणों को सामान्य रूप से वैध माना जाएगा।
इसके अलावा कृषि भूमि पर उपविधियों के अनुरूप बनाए गए आवासीय भवन और स्थापित उद्योगों को भी वैध माना जाएगा तथा उन्हें भविष्य के मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। हालांकि कृषि भूमि पर बने मल्टीप्लेक्स, बड़े व्यावसायिक और कमर्शियल निर्माणों को वैधता नहीं मिलेगी।
