योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में कृषि और पशुपालन को एकीकृत कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन, उपयोग और विपणन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की गोशालाओं को उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सके।
मंत्री ने दिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधानसभा स्थित समिति कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक कर गोबर आधारित उत्पादों को लेकर विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को पुनर्स्थापित करना है। गोबर संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
सफल मॉडल्स का होगा विस्तार
बैठक में झांसी, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में चल रहे सफल बायोगैस और जैविक खाद मॉडल्स का जिक्र किया गया।निर्देश दिए गए कि इन मॉडलों का अध्ययन कर पूरे प्रदेश में लागू किया जाए।
कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों और गोबर गैस प्लांट्स के विस्तार पर भी जोर दिया गया।
ऊर्जा और खाद—दोहरा लाभ
बायोगैस उत्पादन से जहां ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं इससे निकलने वाली स्लरी खेतों के लिए उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद का काम करेगी।इससे किसानों को एक साथ ऊर्जा और उर्वरक—दोनों का लाभ मिलेगा।
मानकीकरण और मार्केटिंग पर फोकस
सरकार ने गोबर आधारित खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए—
मानकीकरण (स्टैंडर्डाइजेशन) बेहतर पैकेजिंग गुणवत्ता मानकों का निर्धारण पर जोर दिया है, ताकि किसानों को भरोसेमंद उत्पाद मिल सकें।साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से इसकी उपलब्धता और मार्केटिंग को मजबूत करने की योजना है।
जैविक खेती को नई दिशा
सरकार का मानना है कि गोबर आधारित उत्पादों के उपयोग से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ेगा और उत्पादन क्षमता लंबे समय तक मजबूत रहेगी।
