रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। अब चयनित अभ्यर्थियों को पुलिस के चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट आने तक नियुक्ति पत्र का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
योगी सरकार ने सरकारी भर्तियों में चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने के लिए नई एकीकृत नीति जारी की है। इसके तहत पुलिस सत्यापन पूरा होने से पहले भी चयनित अभ्यर्थियों को शर्तों के साथ नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा।
प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, अब केवल पुलिस सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति नहीं रोकी जाएगी। नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी से निर्धारित सत्यापन फॉर्म और स्वघोषणा पत्र लेकर नियुक्ति पत्र जारी कर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी। निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर नियुक्ति प्राधिकारी मामले को गृह विभाग के पास भेज सकेंगे, ताकि रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अब पुलिस घर जाकर नहीं करेगी पूछताछ
नई नीति में अभ्यर्थियों को पुलिस सत्यापन के नाम पर होने वाली भागदौड़ से भी राहत दी गई है। सामान्य परिस्थितियों में पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी।
Transferred को व्यक्तिगत रूप से पुलिस कार्यालय भी नहीं बुलाया जाएगा। इसके अलावा अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग भी सामान्य तौर पर नहीं की जाएगी। पुलिस उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट भेजेगी।
सिर्फ FIR दर्ज होने से नहीं अटकेगी सरकारी नौकरी
सरकार ने आपराधिक मामलों में अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। नई नीति के मुताबिक, किसी व्यक्ति के खिलाफ सिर्फ एफआईआर दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने से उसे सरकारी नौकरी के लिए स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा।
ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति और न्यायालय में मुकदमे की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। कुछ गंभीर अपराधों में आरोप तय होने या दोषसिद्धि की स्थिति में अयोग्यता लागू हो सकती है, जबकि अन्य मामलों में दोषसिद्धि के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। अभ्यर्थियों को अपने खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी जानकारी देनी होगी। कोई तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर नियुक्ति रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यदि पुलिस सत्यापन में किसी अभ्यर्थी के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट आती है तो उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जिलाधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजने से पहले संबंधित अभ्यर्थी की सुनवाई करेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी पूरी की जा सकेगी।
पहले से सरकारी नौकरी कर रहे कर्मचारियों को राहत
नई नीति के तहत पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। वहीं, पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश से बाहर एक साल या उससे अधिक समय तक रहने वाले अभ्यर्थियों के संबंध में संबंधित राज्य की पुलिस से भी जानकारी ली जाएगी।
यह नीति प्रदेश के सरकारी विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर भी लागू होगी। पहले से लंबित चरित्र सत्यापन के मामलों का निस्तारण भी इसी नई व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
