लखनऊ, 18 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के पांच जिलों में आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले सेंसर स्थापित किए जा रहे हैं। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के सहयोग से एटा, मेरठ, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी और सोनभद्र में यह व्यवस्था तैयार की जा रही है।
इसका उद्देश्य बिजली गिरने की गतिविधियों का पता लगाकर समय रहते चेतावनी देने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का अवसर उपलब्ध कराना है।
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, इस पहल से प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर सूचना पहुंचाने और बचाव की तैयारियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। खासकर बारिश के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों, खुले स्थानों पर काम करने वाले मजदूरों, ग्रामीणों और पशुपालकों को आकाशीय बिजली से गंभीर खतरा रहता है।
पूर्व चेतावनी मिलने से लोगों को सतर्क करने और संभावित हादसों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने में सहायता मिल सकती है।
सोनभद्र के 32 गांवों में 1.33 करोड़ से बनेगी व्यवस्था
आकाशीय बिजली से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सोनभद्र जिले के दुद्धी ब्लॉक के 32 गांवों में भी विशेष पहल की जा रही है। यहां 1.33 करोड़ रुपये की लागत से ‘लाइटनिंग डिटेक्शन एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित किया जा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली गिरने की आशंका के दौरान जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना है, ताकि वे खुले स्थानों से हटकर सुरक्षित जगहों पर पहुंच सकें। स्थानीय स्तर पर चेतावनी मिलने से ग्रामीणों और पशुपालकों को विशेष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।
आपदा प्रबंधन में तकनीक की अहम भूमिका
प्रदेश में आपदा प्रबंधन की रणनीति के तहत अब केवल घटना के बाद राहत और बचाव कार्यों पर ही नहीं, बल्कि संभावित खतरे का पहले पता लगाने और नुकसान कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है। आकाशीय बिजली की गतिविधियों पर नजर रखने वाले सेंसर मौसम संबंधी जानकारी जुटाने और चेतावनी जारी करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।
इस व्यवस्था से स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को भी समय रहते सतर्कता बरतने तथा जरूरत के अनुसार बचाव अभियान चलाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन के साथ लोगों में जागरूकता और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन भी जरूरी होगा।
सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदा से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
