लखनऊ/गौतमबुद्धनगर, 17 अप्रैल। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्यभर के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। प्रदेश की राज्यपाल की मुहर के साथ ही इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है, जिससे नई दरें अब कानूनी रूप से बाध्यकारी हो गई हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया श्रमिक-नियोक्ता विवाद के बाद सरकार ने सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए यह कदम उठाया। वेतन वृद्धि को लेकर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी, जिसकी सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया।
सरकार ने प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित करते हुए क्षेत्रीय जीवन-यापन लागत के आधार पर मजदूरी तय की है:
प्रथम श्रेणी (गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद):
- अकुशल श्रमिक: ₹13,690 प्रति माह
- अर्द्धकुशल श्रमिक: ₹15,059 प्रति माह
- कुशल श्रमिक: ₹16,868 प्रति माह
द्वितीय श्रेणी (नगर निगम वाले अन्य जिले):
- अकुशल: ₹13,006
- अर्द्धकुशल: ₹14,306
- कुशल: ₹16,025
तृतीय श्रेणी (शेष जिले):
- अकुशल: ₹12,356
- अर्द्धकुशल: ₹13,590
- कुशल: ₹15,224
इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) शामिल किया गया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। गौरतलब है कि 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिससे वेतन में अंतर बढ़ गया था। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को शामिल करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय श्रमिकों को राहत देने के साथ-साथ औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन गतिविधियों को सुचारु रखने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई मजदूरी दरों के अनुपालन में किसी भी तरह की अनियमितता या कटौती पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
समिति की अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने की, जबकि इसमें श्रमिकों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों को शामिल कर सभी पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद संतुलित प्रस्ताव तैयार किया गया।
