लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में अब हर कक्षा की दीवार बच्चों और शिक्षकों को यह बताएगी कि उस कक्षा के अंत तक कौन-कौन से सीखने के लक्ष्य पूरे करना अनिवार्य हैं। निपुण भारत मिशन के कक्षा-5 तक विस्तार के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने 31 जुलाई तक सभी परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों और डायट में ‘निपुण लक्ष्य’ पोस्टर अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य लक्ष्य आधारित शिक्षण को मजबूत करना और प्रत्येक बच्चे की सीखने की प्रगति को तय मानकों के आधार पर मापना है। बालवाटिका से लेकर कक्षा-5 तक प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। संबंधित कक्षा का पोस्टर ऐसे स्थान पर लगाया जाएगा, जहां शिक्षक और विद्यार्थी उसे प्रतिदिन आसानी से देख सकें।
निरीक्षण में होगी सख्त निगरानी
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था की निगरानी के लिए सपोर्टिव सुपरविजन ऐप और निरीक्षण ऐप में पोस्टर से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को पोस्टर का सत्यापन करने के साथ उसकी फोटो अपलोड करना भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा निपुण संकल्प कार्यशालाओं और सभी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इन लक्ष्यों पर विशेष चर्चा की जाएगी।
कक्षा के अनुसार तय किए गए अधिगम लक्ष्य
निपुण लक्ष्य चार्ट में प्रत्येक कक्षा के लिए विषयवार सीखने के परिणाम निर्धारित किए गए हैं।
- बालवाटिका: अक्षर और संख्या पहचान, अपना नाम पढ़ना और लिखना जैसी बुनियादी दक्षताएं।
- कक्षा 1 और 2: पढ़ना-लिखना, गिनती, जोड़-घटाव तथा दैनिक जीवन में मुद्रा का उपयोग।
- कक्षा 3 से 5: हिंदी में गद्यांश पढ़कर कम से कम 75 प्रतिशत प्रश्नों के सही उत्तर देना, समाचार पत्र पढ़कर स्वतंत्र लेखन, गणित में गुणा, भाग, भिन्न और ज्यामितीय आकृतियों की समझ, पर्यावरण अध्ययन की व्यावहारिक जानकारी तथा अंग्रेजी में समझ के साथ पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करना।
अभिभावकों को भी दी जाएगी जानकारी
विभाग का कहना है कि केवल शिक्षकों ही नहीं, बल्कि अभिभावकों और अन्य हितधारकों को भी इन अधिगम लक्ष्यों की नियमित जानकारी दी जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई पर सामूहिक रूप से ध्यान दिया जा सके।
क्या बोलीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा?
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि ‘निपुण लक्ष्य’ केवल पोस्टर नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के अधिगम की दिशा तय करने वाले मानक हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप निर्धारित सीखने के स्तर तक पहुंचे।
