उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत नामांकन प्रक्रिया में योगी सरकार की सख्ती का सीधा असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। शासन के कड़े निर्देशों के बाद महज चार दिनों के भीतर ही नामांकन में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में नई सक्रियता देखने को मिल रही है।
अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा के सख्त निर्देश और स्पष्ट चेतावनी के बाद जिलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई है। इसका नतीजा यह रहा कि 22 अप्रैल तक जहां कुल नामांकन 1,08,866 था, वहीं अगले चार दिनों में 15,679 नए प्रवेश दर्ज किए गए। अब यह संख्या बढ़कर 1,24,545 तक पहुंच गई है, जो करीब 14.4 प्रतिशत की तेज वृद्धि को दर्शाती है।
राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आरटीई के तहत किसी भी पात्र बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसी दिशा में सख्ती के साथ काम करते हुए अब तक कुल 1,95,740 आवंटित सीटों के सापेक्ष 63.6 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
यह तेजी इस बात का संकेत है कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर साफ नजर आ रहा है। जिलों में अधिकारी अब मिशन मोड में काम कर रहे हैं और हर दिन प्रगति की समीक्षा की जा रही है।
शासन की ओर से यह भी निर्देश दिए गए हैं कि तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सीधे कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार की इस सख्त कार्यशैली से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में शेष बच्चों का भी तेजी से नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार पूरी तरह मिल सके।
