आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को प्रेस वार्ता में महिलाओं के आरक्षण, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में महिला मतदाताओं की संख्या में असामान्य कमी लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
संजय सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की जनसंख्या में लगभग 48 प्रतिशत महिलाएं हैं, लेकिन मतदाता सूची में उनकी हिस्सेदारी केवल 45 से 45.64 प्रतिशत के बीच है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगभग ढाई से तीन प्रतिशत महिला मतदाता आखिर कहां गायब हो गईं। उन्होंने आशंका जताई कि यह अंतर कहीं पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाली महिलाओं से तो जुड़ा नहीं है।
उन्होंने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अंतर का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, दिसंबर में जारी सूची में कुल 17 करोड़ 2 लाख मतदाता थे, जबकि जनवरी में यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख रह गई। उन्होंने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा कि करीब साढ़े चार करोड़ मतदाताओं का नाम सूची से गायब होना चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां तैयार की गईं और कई जगहों पर बड़े पैमाने पर वोट काटे गए। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ में ही 22 से 23 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी मौजूदा विधानसभा ढांचे में आरक्षण देने का समर्थन करती है, लेकिन बिना जनगणना के सीटों का पुनर्निर्धारण महिलाओं के साथ अन्याय होगा।
केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी निशाना साधते हुए संजय सिंह ने कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि कमजोर हो रही है और वैश्विक मामलों में देश की भूमिका प्रभावी नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध और वैश्विक तनाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ती है और आम जनता प्रभावित होती है।
अंत में उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनी रहे।
