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यूपीआईटीएस: लोकल से ग्लोबल की बड़ी छलांग

यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश के उत्पादों, सेवाओं, निर्यातकों और एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने का पुल है। यहां भारतीय निर्माता, निर्यातक, एमएसएमई, निवेशक, वैश्विक खरीदार और साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल मौजूद हैं। सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा का साकार रूप यहां परिलक्षित है और यही इस ट्रेड शो की असली सफलता है। यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की क्षमता पर सवाल उठाने वालों को एक स्पष्ट जवाब भी है।”

– सुधीर जे. कुमार, एडिटर, वाइल्ड लाइफ टुडे

ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) को अब तीन दिन हो चुके हैं। ऐसे में इसके पीछे की वैचारिक सोच पर भी बात करना जरूरी है। किसी भी राज्य के आर्थिक उभार को समझने के लिए कई बार आंकड़ों से ज्यादा उस विचार को समझना जरूरी होता है, जो आगे चलकर आंकड़ों में बदलता है।

यह विचार इस अवधारणा पर आधारित है कि किसी भी अर्थव्यवस्था को केवल उत्पादन की मात्रा से बड़ा नहीं माना जा सकता। अर्थव्यवस्था तब व्यापक विस्तार की ओर बढ़ती है, जब स्थानीय बाजार और वैश्विक बाजार के बीच की दूरी सिमटने लगती है। अर्थव्यवस्था का आकार तब बड़ा होता है, जब कोई प्रदेश खुद को विश्व-अर्थतंत्र का भागीदार मानने लगता है।

उत्तर प्रदेश आज इसी वैचारिक मोड़ पर है। वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का जो लक्ष्य प्रदेश ने अपने सामने रखा है, वह इसी सोच पर आधारित है कि विकास अब केंद्र से परिधि की ओर ही नहीं, बल्कि परिधि से केंद्र की ओर भी बहेगा। गांव-कस्बों में तैयार होने वाला उत्पाद अब सिर्फ दिल्ली-मुंबई की मंडियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिंगापुर, टोक्यो और मॉस्को जैसे वैश्विक बाजारों से भी जुड़ सकेगा।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो इसी विचार का व्यावहारिक रूप है। इसीलिए इसे प्रदेश की आर्थिक सोच में आ रहे बदलाव के बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है।

वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में MSME की भूमिका

वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की अवधारणा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह लक्ष्य केवल सरकारी निवेश या बड़े औद्योगिक घरानों की पूंजी के दम पर हासिल नहीं किया जा सकता। इसकी नींव उन लाखों छोटे और मझोले उद्यमों में है, जो प्रदेश के हर जिले में फैले हुए हैं।

मुरादाबाद का पीतल, भदोही का कालीन, कन्नौज का इत्र, फिरोजाबाद की चूड़ियां और वाराणसी की साड़ियां उत्तर प्रदेश के स्थानीय हुनर की पहचान हैं। एक दशक पहले तक ये उत्पाद काफी हद तक अपनी स्थानीय पहचान की सीमा में ही बंधे दिखाई देते थे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हुनर सदियों से प्रदेश में मौजूद है, लेकिन इसे वैश्विक मानकों, वैश्विक पैकेजिंग, वैश्विक मांग और वैश्विक तकनीक से जोड़ने के प्रयास योगी सरकार में शुरू हुए। यूपीआईटीएस में हो रही बी2बी (बिजनेस टू बिजनेस) बैठकें अब इस कोशिश के परिणाम को सामने ला रही हैं।

हजारों B2B बैठकें, करोड़ों के कारोबार की संभावनाएं

ग्रेटर नोएडा में चल रहे ट्रेड शो के आंकड़ों पर नजर डालें तो दूसरे दिन 4,700 बी2बी बैठकें हुईं। इस दौरान 412 समझौतों पर मुहर लगी और 54.2 मिलियन डॉलर के कारोबार की राह खुली।

पहले दिन भी 2,800 से अधिक बैठकें हुईं। इनमें प्रदेश के करीब 500 एमएसएमई शामिल हुए और लगभग 140 करोड़ रुपये की व्यावसायिक पूछताछ दर्ज हुई।

इन आंकड़ों को केवल संख्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता। अगर इन्हें वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के संदर्भ में देखें तो यह उस दिशा में बढ़ने वाली शुरुआती सीढ़ियों में से एक है, जिस पर पैर रखकर उत्तर प्रदेश अपने आर्थिक लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि व्यापार गरीबी कम करने का एक भरोसेमंद माध्यम है, क्योंकि इससे संभावनाओं के कई रास्ते खुलते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आर्थिक दृष्टि भी इसी सोच से मेल खाती है, जो अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगी है।

वैश्विक भरोसे की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

दशकों तक उत्तर प्रदेश को निवेश के नक्शे पर ऐसे प्रदेश के रूप में देखा जाता रहा, जहां संभावनाएं तो बहुत थीं, लेकिन उन्हें साकार करने के प्रयास अपेक्षाकृत कम दिखाई देते थे। ऐसे में वैश्विक भरोसा हासिल करना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त थी।

सिंगापुर की कंपनियों का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में कार्गो फैसिलिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क, कोल्ड स्टोरेज और एमआरओ गतिविधियों के लिए आगे आना, वियतनाम के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल पर बातचीत, रूस के साथ डिफेंस, फार्मा और मेडिकल डिवाइस को लेकर संभावनाएं, बेलारूस के साथ मशीनरी और वुड टेक्नोलॉजी पर चर्चा और जापान के साथ ईवी सेक्टर में सहयोग की उम्मीद—इन सभी गतिविधियों में एक बात समान दिखाई देती है।

वह यह कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक स्तर पर संभावित साझेदार के रूप में खुद को प्रस्तुत कर रहा है। यूपीआईटीएस ने इस बदलते भरोसे को एक ही मंच पर लाने का काम किया है, जहां अलग-अलग देशों और उद्योगों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का मंच तैयार हुआ है।

परंपरागत उद्योगों के साथ हाईटेक सेक्टर पर जोर

प्रदेश में प्रस्तावित फार्मा पार्क, ललितपुर का बल्क ड्रग पार्क, नोएडा के निकट मेडिकल डिवाइस पार्क और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक चरित्र में बदलाव की दिशा दिखाती हैं।

संदेश यह है कि उत्तर प्रदेश अब उच्च तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक साझेदारी वाले उद्योगों की ओर भी बढ़ना चाहता है। वहीं सहारनपुर और बिजनौर के लकड़ी उद्योग जैसे परंपरागत क्लस्टर भी आधुनिक तकनीक से जुड़ने की दहलीज पर हैं।

वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का पूरा ढांचा इसी संतुलन पर टिका है। यानी परंपरा और तकनीक, स्थानीय हुनर और वैश्विक मानक, छोटे उद्यमी और बड़ी कंपनियां—सभी को एक साथ आगे बढ़ना होगा।

25 करोड़ की आबादी सिर्फ बाजार नहीं, बड़ी ताकत

इसी संदर्भ में प्रदेश की करीब 25 करोड़ आबादी का अर्थ भी नए सिरे से समझने की जरूरत है। यह आबादी सिर्फ उपभोक्ता नहीं है, बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा श्रमबल, सबसे बड़ा कौशल-भंडार और अब उद्यमशील शक्ति के रूप में भी सामने आ रही है।

नई सोच उत्पादन और नवाचार पर केंद्रित है। यूपीआईटीएस की सार्थकता इसी पूरी प्रक्रिया को गति देने में है। ट्रेड शो में होने वाली बी2बी बैठकें भविष्य के आर्थिक रिश्तों की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती हैं।

स्थानीय पहचान को वैश्विक बाजार से जोड़ना

वैश्वीकरण का वास्तविक अर्थ स्थानीय पहचान को मिटाना नहीं, बल्कि स्थानीय सामर्थ्य को वैश्विक अवसर से जोड़ना रहा है।

उत्तर प्रदेश के पास उत्पादों की विविधता, कृषि की शक्ति, युवा मानव संसाधन और तेजी से आगे बढ़ता औद्योगिक आधार है। जरूरत सिर्फ इतनी थी कि इन सभी क्षमताओं के बीच ऐसा नेटवर्क तैयार हो, जिसके जरिए प्रदेश का कोई भी छोटा उद्यमी दुनिया के किसी बड़े बाजार से सीधे संवाद कर सके।

यूपीआईटीएस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है। यह उत्तर प्रदेश के उत्पादों, सेवाओं, निर्यातकों और एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने का पुल है। यहां भारतीय निर्माता, निर्यातक, एमएसएमई, निवेशक, वैश्विक खरीदार और साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल मौजूद हैं।

सरकार की ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा का साकार रूप यहां देखने को मिल रहा है और यही इस ट्रेड शो की असली सफलता है। यूपीआईटीएस उत्तर प्रदेश की क्षमता पर सवाल उठाने वालों को एक स्पष्ट जवाब भी

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