न्यूज डेस्क, लखनऊ
पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में प्रज्वलित होने वाला एक-एक दीप देश और प्रदेश की समृद्धि का आधार बनेगा। कभी जिस अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई जाती थीं, आज उसी अयोध्या में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा होती है। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है।
अब अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि की नई पहचान भी बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति ने देश में आतंकवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा दिया, जबकि संतुष्टिकरण की नीति रामराज्य का मार्ग प्रशस्त करती है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही रामराज्य की वास्तविक अवधारणा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को पीलीभीत में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और नूरानपुर में नवनिर्मित अमृत सरोवर का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने व्यासपीठ को नमन किया और कथा व्यास संत अंजनी शरण सहित उपस्थित संतों का अभिनंदन किया।
आस्था और संस्कृति ने भारत को एकता के सूत्र में बांधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक एकता है। देश के उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भाषा, वेशभूषा, खानपान और रहन-सहन में भिन्नता है, लेकिन आस्था और संस्कृति सभी को एक सूत्र में बांधती है। यही भारत की विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि दुनिया के करीब 200 देशों की अपनी अलग पहचान और चुनौतियां हैं, लेकिन भारत की सांस्कृतिक विरासत उसे विशिष्ट बनाती है।
योगी ने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पहले शुकतीर्थ में श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन हुआ था। आज भी देश और दुनिया में उसी श्रद्धा के साथ भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। गांव-गांव में रामलीला, श्रीराम कथा और अखंड रामायण पाठ की परंपरा समाज को भगवान राम के आदर्शों से जोड़ती है। भगवान राम का चरित्र जीवन की हर चुनौती में सही रास्ता दिखाता है और मर्यादित आचरण की प्रेरणा देता है।
कभी रामभक्तों पर चली थीं गोलियां, आज अयोध्या में होती है पुष्पवर्षा
मुख्यमंत्री ने दो नवंबर 1990 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। जय श्रीराम का उद्घोष करने और रामभक्तों के अयोध्या पहुंचने पर प्रतिबंध जैसी स्थिति थी। राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं ने संघर्ष और बलिदान दिया। पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या की पहचान संकरी गलियों, गंदगी और बदहाल सड़कों से होती थी। रेलवे की सिंगल लाइन थी और हवाई सेवा की सुविधा भी नहीं थी। आज अयोध्या में चार लेन की सड़कें, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुविधा उपलब्ध है। हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या में प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वहीं, विशेष पर्वों और त्योहारों के दौरान यह संख्या पांच लाख से लेकर 50 लाख तक पहुंच जाती है। इससे अयोध्या में धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
2017 से पहले बर्बाद होता था विकास का पैसा, अब गरीबों के कल्याण पर खर्च
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले विकास के लिए आने वाला पैसा इधर-उधर बर्बाद होता था। अब सरकारी धन का उपयोग गरीबों के कल्याण, जनसुविधाओं और धार्मिक स्थलों के विकास में किया जा रहा है। गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, किसानों को सम्मान निधि और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सरकार हर वर्ग के हितों के लिए काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के अनुरूप बिना किसी भेदभाव के पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। यही रामराज्य की मूल भावना है।
योगी ने कहा कि तुष्टिकरण से समाज में समस्याएं बढ़ती हैं, जबकि संतुष्टिकरण से विश्वास, सुरक्षा और समृद्धि का वातावरण तैयार होता है। सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ देना है, न कि किसी वर्ग विशेष को प्राथमिकता देना।
काशी, मथुरा से गोला गोकर्णनाथ तक संवर रहे धार्मिक स्थल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ तीर्थस्थलों का विकास किया जा रहा है। अयोध्या के साथ काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और मां विंध्यवासिनी धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार हुआ है। लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, बरेली की नाथ नगरी भी अपनी धार्मिक पहचान को नए स्वरूप में स्थापित कर रही है।
उन्होंने कहा कि तीर्थस्थलों का विकास केवल भवन और सड़कों का निर्माण नहीं है, बल्कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होता है। धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मकता और आपसी जुड़ाव को बढ़ाते हैं। सकारात्मक सोच ही विकास और समृद्धि का रास्ता तैयार करती है।
भगवान राम का जीवन हर रिश्ते और कर्तव्य की देता है सीख
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने आदि रामायण की रचना कर पूरी दुनिया को भगवान राम के आदर्शों से परिचित कराया। आज रामायण अनेक भाषाओं में उपलब्ध है और करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा दे रही है। भगवान राम का जीवन एक पुत्र, भाई, पति, शिष्य और समाज के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उसमें बताए गए आदर्शों को अपने जीवन और व्यवहार में उतारना भी है। भगवान राम का चरित्र हमें कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा, धैर्य और कर्तव्य के रास्ते पर चलने की सीख देता है।
महंत योगी शांतिनाथ के जीवन को किया याद
मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन सहज, सरल और फक्कड़ संत की परंपरा का उदाहरण था। महंत हनुमान नाथ ने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भावनाओं के अनुरूप उनके समाधि स्थल का निर्माण कराया। अब उनकी पुण्य स्मृति में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की स्वच्छता और वहां के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की। साथ ही श्रद्धालुओं से श्रीराम कथा के बाद आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
श्रीराम कथा महोत्सव में प्रदेश सरकार के मंत्री बलदेव सिंह औलख और संजय गंगवार, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता, विधान परिषद सदस्य संजीव प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक विवेक वर्मा और बाबूराम पासवान, स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर, मंदिर के महंत हनुमान नाथ सहित बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे।
