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प्रभु श्रीराम का नाम पूरे भारत को जोड़ता है, हर भारतीय का डीएनए राम से जुड़ा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि प्रभु श्रीराम भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन की हर समस्या का समाधान प्रभु श्रीराम के नाम में निहित है और दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले भारतीय का डीएनए श्रीराम से जुड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जगद्गुरु Ramabhadracharya द्वारा आयोजित रामकथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत को पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक जोड़ने वाला यदि कोई एक नाम है, तो वह प्रभु श्रीराम का नाम है।

सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों के आधार हैं। यही कारण है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन लगभग 500 वर्षों तक विभिन्न रूपों में चलता रहा। उन्होंने कहा कि देश के संतों, धर्माचार्यों और करोड़ों श्रद्धालुओं के निरंतर प्रयासों से आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका है।

उन्होंने कहा कि राम का नाम समाज के विभिन्न वर्गों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। श्रीराम का जीवन आदर्श शासन, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा का संदेश देता है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की पैरवी

कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भारतीय संस्कृति में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में केवल “बीवी” या “वाइफ” नहीं, बल्कि “धर्मपत्नी” की अवधारणा है। उनके अनुसार, जो महिला अपने पति को पतन के मार्ग से बचाए, वही पत्नी कहलाने योग्य है।

रामभद्राचार्य ने कहा कि नारी सम्मान सनातन संस्कृति का मूल मंत्र है। उन्होंने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुसार महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जाए तो वह कम नहीं होगा। परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरि है।

रामकथा में नवधा भक्ति का किया वर्णन

रामकथा के दौरान रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम के वनवास काल के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने आदिवासियों, वनवासियों और माता शबरी से भगवान श्रीराम के मिलन की कथा सुनाई। साथ ही ऋषि शरभंग के प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवधा भक्ति के छठे स्वरूप ‘वंदन भक्ति’ की विस्तृत व्याख्या की।

उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन समाज के हर वर्ग को सम्मान और समानता का संदेश देता है। रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और आदर्श जीवन की शिक्षा देने का माध्यम है।

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