न्यूज डेस्क, लखनऊ
लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
ओर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में मदद दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और बिजली आपूर्ति में सुधार के प्रयासों से कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
सामूहिक विवाह योजना से 28,833 जोड़ों का विवाह
समाज कल्याण विभाग की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मददगार बन रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक प्रदेश में 28,833 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है।
सरकार ने इस वर्ष 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना के तहत अब तक 1,16,668 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 34,845 स्वीकृत किए गए हैं। जांच में 11,679 आवेदन अपात्र पाए गए हैं।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार, हरदोई में 1,385 जोड़ों के विवाह के साथ प्रदेश में सबसे अधिक विवाह संपन्न हुए हैं। सीतापुर में 1,335, पीलीभीत में 1,271 और आजमगढ़ में 1,242 जोड़ों का विवाह कराया गया है।
योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के विवाह पर एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। इसमें 64 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में गृहस्थी बसाने के लिए, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री के लिए और 15 हजार रुपये विवाह समारोह की व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं। ई-केवाईसी, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से प्रमाणपत्रों के डिजिटल सत्यापन और आधार आधारित भुगतान व्यवस्था के जरिए पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर जोर, व्यापारियों की सुरक्षा प्राथमिकता
सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस गश्त, संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई और अवैध गतिविधियों पर निगरानी के जरिए बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुरक्षित माहौल व्यापारियों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है। बाजारों में सुरक्षा और भरोसे का वातावरण होने से व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलती है। देर शाम तक संचालित होने वाले बाजारों के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं अहम भूमिका निभाती हैं।
गांव से शहर तक बिजली आपूर्ति में सुधार का प्रयास
प्रदेश में कारोबार को गति देने के लिए बिजली आपूर्ति भी महत्वपूर्ण आधार है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21 घंटे 30 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। सरकार की ओर से बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने और बढ़ती मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग वर्ष 2014 में 12,327 मेगावाट थी, जो 2017 में बढ़कर 16,110 मेगावाट हो गई। इसके बाद मांग में लगातार वृद्धि हुई। 24 जून 2026 को प्रदेश में 32,673 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की आपूर्ति किए जाने की जानकारी दी गई।
नियमित बिजली मिलने से दुकानों, छोटे उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कामकाज को सहूलियत मिलती है। हालांकि, बढ़ती मांग के बीच सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
सामाजिक कल्याण से लेकर कारोबार तक विकास पर फोकस
उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देने वाली सामूहिक विवाह योजना और व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए कानून-व्यवस्था तथा बिजली आपूर्ति पर जोर, सरकार की अलग-अलग प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
जहां विवाह योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को आर्थिक राहत और सम्मानजनक आयोजन में मदद देना है, वहीं सुरक्षित बाजार और नियमित बिजली कारोबार के संचालन में सहायक हो सकते हैं।
इन पहलों का प्रभाव योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचने, बिजली आपूर्ति की नियमितता और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति से जुड़ा है।
