लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर बलिदानी पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए कहा कि नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है।
उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया।
साथ ही, संकट में फंसे लोगों की जान बचाने में यूपी पुलिस की मानवीय भूमिका भी सामने आई है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या संबंधी पोस्ट के आधार पर समय रहते कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक जनवरी 2023 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच 4 हजार से अधिक लोगों की जान बचाई है।
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर साझा संदेश में कहा कि देश की सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों के जीवन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों का शौर्य, साहस और समर्पण सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि वीर पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के त्याग को हमेशा याद रखा जाएगा। सरकार उत्तर प्रदेश को सुरक्षित, न्यायपूर्ण और भयमुक्त बनाने के लिए लगातार काम करती रहेगी।
माफिया पर कार्रवाई, पुलिस व्यवस्था में बदलाव
सीएम योगी ने वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में माफिया और अराजक तत्वों के हौसले बुलंद थे। मथुरा के जवाहर बाग में कानून की रक्षा करते हुए पुलिस अधिकारियों को अपने प्राणों का बलिदान देना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश उपद्रव से उत्सव प्रदेश बना है और पुलिस को अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की स्वतंत्रता मिली है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में 2.26 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है। पुलिस प्रशिक्षण क्षमता में 10 गुना वृद्धि, सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली, प्रत्येक जनपद में साइबर थाने और प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना से पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्षम, आधुनिक और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत 88,973 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि ₹15 हजार करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। सरकार के अनुसार, ये कदम अपराध और अपराधियों के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता को
