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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से पहले सीएम योगी की ‘योगी की पाती’, बोले- अब AI साक्षरता भी समय की जरूरत

रिपोर्ट- प्रिया बाजपेयी शुक्ला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से पहले प्रदेशवासियों के नाम लिखी अपनी चिट्ठी ‘योगी की पाती’ में साक्षरता को बदलते दौर की जरूरतों से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में केवल अक्षर ज्ञान पर्याप्त नहीं है। आज डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की साक्षरता भी समय की आवश्यकता बन गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती तकनीक और तेजी से विकसित हो रही दुनिया में शिक्षा का दायरा भी व्यापक होना चाहिए। उन्होंने हर बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाने, प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और युवाओं को कौशल, तकनीक तथा नवाचार से जोड़ने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाए।

शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण की नींव

शिक्षक दिवस के अवसर पर 81 गुरुजनों को सम्मानित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की नींव रखने वाला बताते हुए कहा कि शिक्षक वह दीप हैं, जो ज्ञान का प्रकाश फैलाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषयों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस

मुख्यमंत्री ने 8 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस को ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि साक्षरता का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक शिक्षा और ज्ञान की पहुंच सुनिश्चित करना होना चाहिए।

योगी ने शिक्षा के उद्देश्य को केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित मानने से इनकार किया। उनके अनुसार शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने वाली समझ प्रदान करना है।

गुरुकुल परंपरा का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्राचीन भारतीय गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, अनुशासन, कर्तव्यों और दायित्वबोध की भी शिक्षा दी जाती थी।

उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में भी इसी समग्र दृष्टिकोण को आधार बनाया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीक और AI जैसी नई क्षमताओं के साथ विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, संस्कार और जिम्मेदारी की भावना का विकास भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री के संदेश में शिक्षा को अक्षर ज्ञान से आगे बढ़ाकर डिजिटल और AI साक्षरता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से बच्चों, युवाओं और समाज के प्रत्येक वर्ग को बदलते समय के अनुरूप सक्षम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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