भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति और अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का असर उत्तर प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में भी दिखाई दे रहा है। कभी अवैध खनन और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर चर्चा में रहने वाला यह विभाग अब पारदर्शी प्रशासन और तकनीक आधारित निगरानी के जरिए सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
योगी सरकार के वर्ष 2017 से 2026 तक के कार्यकाल में प्रदेश को खनन क्षेत्र से ₹30,524 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा वर्ष 2012 से 2017 के बीच तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में मिले करीब ₹4,700 करोड़ के खनन राजस्व से कई गुना अधिक है।
उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव के मुताबिक, राजस्व में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई, पारदर्शी ई-नीलामी, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम के कारण संभव हुई है।
अवैध खनन पर तकनीक से शिकंजा
अवैध खनन की निगरानी के लिए निदेशालय में पॉइंट वाइज ग्राउंड रिस्पॉन्स सिस्टम (PGRS) लैब स्थापित की गई है। गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेजिंग और एआई तकनीक के माध्यम से प्रदेश में 66 अवैध खनन क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की गई। इस दौरान ₹2.19 करोड़ से अधिक की जुर्माना राशि और राजस्व की वसूली की गई।
ई-नीलामी से पारदर्शिता, ‘यूपी माइन मित्र’ से ऑनलाइन सेवाएं
वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक प्रमुख खनिजों के 10 ब्लॉकों के कंपोजिट लाइसेंस और 3 ब्लॉकों के खनन पट्टों की पारदर्शी ई-नीलामी की गई है। वहीं, ‘यूपी माइन मित्र’ पोर्टल के जरिए 10 से अधिक नागरिक और व्यावसायिक सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका को कम करने में मदद मिली है।
IMSS और AI चेकगेट से अवैध परिवहन पर रोक
अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (IMSS) लागू किया गया है। इसके तहत खनन पट्टों की जियो-फेंसिंग, वाहनों में GPS/VTS ट्रैकिंग, RFID टैग और IoT आधारित स्वचालित चेकगेट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एम-सैंड नीति से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर
नदियों में प्राकृतिक बालू के अत्यधिक दोहन को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने एम-सैंड नीति-2024 लागू की है। इसके तहत प्राकृतिक बालू के विकल्प के तौर पर निर्मित बालू को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे निर्माण कार्यों के लिए वैकल्पिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ अवैध बालू खनन पर अंकुश लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद मिलने का दावा किया गया है।
सरकार का कहना है कि तकनीक, डिजिटल सेवाओं और पारदर्शी प्रक्रियाओं के जरिए खनन क्षेत्र में सुधार की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे राजस्व बढ़ाने के साथ अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
