रिपोर्ट : प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। 68,500 शिक्षक भर्ती-2018 में आरक्षण विसंगति का मामला एक बार फिर गरमा गया है। लंबे समय से न्याय और नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा के सामने पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।
पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए आरक्षण विसंगति दूर करने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग उठाई।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को जबरन सड़क से हटाया और बसों में भरकर वापस ईको गार्डन भेज दिया
अभ्यर्थियों का आरोप है कि 2018 की 68,500 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को समान अर्हता मानकों पर रखते हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि ओबीसी अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं मिला। इससे बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, उन्होंने अपनी मांगों और आरक्षण संबंधी विसंगतियों के साक्ष्य राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के सामने भी रखे हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि संबंधित संस्थाओं की ओर से उनके पक्ष में संस्तुतियां और आदेश भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
150 में 60 अंक के आधार पर परिणाम संशोधित करने की मांग
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि ओबीसी वर्ग को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम का पुनरीक्षण किया जाए।
उनका कहना है कि संशोधित परिणाम जारी कर सभी पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। इसके साथ ही आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मंत्री की बैठक में भी उठा था मुद्दा, नहीं निकला समाधान
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष वर्मा और तूफान सिंह ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। अभ्यर्थियों के अनुसार, उस दौरान उनकी मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।
63 दिनों से आंदोलन, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को सौंपे ज्ञापन
अभ्यर्थियों ने बताया कि पिछले 63 दिनों से वे ईको गार्डन में धरना दे रहे हैं। इस दौरान ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई मंत्रियों, भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के आवास व कार्यालयों पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपे गए। इनमें ओमप्रकाश राजभर, संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह शामिल हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि हर स्तर पर अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिला है।
सात दिन से भूख हड़ताल, महिला अभ्यर्थियों ने भी जताई नाराजगी
आंदोलनकारियों के मुताबिक, कई अभ्यर्थी पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत भी प्रभावित हो रही है।
महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम परेशानियों के बावजूद न्याय की उम्मीद में आंदोलन कर रहे हैं। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार और लंबित नियुक्ति की मांग को लेकर किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने साफ किया कि जब तक सरकार आरक्षण विसंगति दूर करने और नियुक्ति के संबंध में लिखित रूप से कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विधानसभा के सामने हुए प्रदर्शन में सचिदानंद, रामप्रवेश, विनोद प्रजापति, गायत्री जायसवाल, संतोष, इकबाल, नसीम, दीपक पटेल, उत्कर्ष वर्मा, संजीव, मनोज, अमित, भूपेंद्र, अरविंद, अजीत, इशिता पाल, गरिमा, प्रतिमा कुशवाहा समेत विभिन्न जिलों के अभ्यर्थी शामिल रहे।
