रिपोर्ट : प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और लव जिहाद मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब संस्थान स्तर पर कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। 6 नवंबर को होने वाली आपात कार्यपरिषद की बैठक में एसटीएफ रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में आरोपों की संस्थागत जांच के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है।
इस मामले में जांच का दायरा अब KGMU से आगे संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) तक पहुंचने के संकेत हैं। एसटीएफ की रिपोर्ट में SGPGI के हेमेटोलॉजी विभाग के एक प्रोफेसर का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में दूसरे चिकित्सा संस्थान के डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सात विभागों के डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवाल
एसटीएफ की रिपोर्ट में KGMU के पैथोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैया कय्यूम की भूमिका का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कथित धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े लोगों, उनके संपर्कों और गतिविधियों का विवरण शामिल है। इसके आधार पर पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी, मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन समेत सात विभागों के डॉक्टरों की भूमिका की जांच कराई जा सकती है।
जांच का दायरा केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका भी परखी जा सकती है। संबंधित डॉक्टरों और अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश होगी कि उन्हें मामले की जानकारी कब मिली और उन्होंने इस संबंध में क्या कदम उठाए।
महिला डॉक्टरों की पुरानी शिकायतों की भी होगी पड़ताल
मामले में महिला डॉक्टरों की पहले की शिकायतें भी जांच का अहम हिस्सा बन सकती हैं। आरोप है कि महिला चिकित्सकों ने उत्पीड़न और अन्य परेशानियों को लेकर कई बार संस्थान प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
एसटीएफ की रिपोर्ट में इन शिकायतों और संबंधित लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। अब प्रस्तावित संस्थागत जांच में यह देखा जा सकता है कि शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की और यदि कार्रवाई में देरी हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
निजी मेडिकल संस्थानों में निवेश का भी उल्लेख
एसटीएफ की रिपोर्ट में कुछ डॉक्टरों के लखनऊ स्थित एक निजी मेडिकल संस्थान में आर्थिक निवेश का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा एक अन्य निजी विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों से जुड़े कुछ चिकित्सकों के कथित संपर्कों और गतिविधियों का विवरण भी शामिल है।
रिपोर्ट में इन आर्थिक और संस्थागत संबंधों की पड़ताल की जरूरत बताई गई है। ऐसे में KGMU की जांच कमेटी इन पहलुओं को भी अपनी जांच में शामिल कर सकती है।
SGPGI के प्रोफेसर का भी रिपोर्ट में नाम
एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. सुमैया कय्यूम के पति और SGPGI के हेमेटोलॉजी विभाग में तैनात प्रोफेसर खलीकुर्रहमान का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा KGMU के रेडियोलॉजी विभाग में तैनात एक डॉक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संबंधित डॉक्टर धर्म विशेष के मरीजों को जांच और इलाज में प्राथमिकता देते थे। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र संस्थागत जांच होना अभी बाकी है।
KGMU के हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान एसटीएफ पहले ही दर्ज कर चुकी है। अब SGPGI के हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान दर्ज करने की भी तैयारी है। इसके बाद संबंधित लोगों की भूमिका और आरोपों की पड़ताल की जाएगी।
कार्यपरिषद के पास बर्खास्तगी तक का अधिकार
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, 6 नवंबर को प्रस्तावित आपात कार्यपरिषद की बैठक में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा होगी। विश्वविद्यालय स्तर पर मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद को जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और डॉक्टरों के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई करने का अधिकार है। एसटीएफ की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और संस्थान स्तर पर होने वाली जांच के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
