कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका ख़ारिज कर दी, जिसमें कथित मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी स्कैम की जांच का मामला सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने की मांग की गई थी.
दरअसल, इस कथित घोटाले में कथित तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती और उनके भाई के शामिल होने का दावा किया गया था. कर्नाटक की लोकायुक्त पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद इस अदालत को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला, जो यह बताता हो कि लोकायुक्त द्वारा की गई जांच पक्षपातपूर्ण, असंतुलित, या ग़लत है. ”
दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता एस. कृष्णा ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल करके इस मामले की जांच का केस सीबीआई को ट्रांसफर करने की अपील की थी.
सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता हैं. उन्होंने मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को 14 साइट आवंटित किए जाने पर सवाल उठाया था.
ये साइटें उन्हें उनकी 3.16 एकड़ ज़मीन के बदले में दी गई थी, जिसे एमयूडीए ने अनाधिकृत ढंग से अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. यह ज़मीन पार्वती को उनके भाई बीएम मल्लिकार्जुन स्वामी ने तोहफ़े में दी थी.
येदियुरप्पा पर भी फ़ैसला
इसके अलावा, जस्टिस नागप्रसन्ना ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के मामले में भी एक फ़ैसला सुनाया.उन्होंने पूर्व सीएम येदियुरप्पा को पोस्को केस में अग्रिम जमानत दे दी. लेकिन, अपराधों का संज्ञान लेने के लिए इस मामले को वापस ट्रायल कोर्ट में भेज दिया है.
दरअसल, एक 17 वर्षीय लड़की की मां ने पुलिस में यह शिकायत की थी कि येदियुरप्पा ने उनकी बेटी का यौन शोषण किया था.येदियुरप्पा के वकील ने बताया कि लड़की की मां ने येदियुरप्पा से इस मामले में मदद मांगी थी, और उन्होंने लड़की की मां को पुलिस कमिश्नर के पास भी भेजा था.
लेकिन, जब महिला पुलिस कमिश्नर से मिली थी, तब उन्होंने पुलिस से इस कथित यौन शोषण की शिकायत नहीं की थी. वकील ने बताया कि क़रीब डेढ़ महीने बाद पुलिस से यह शिकायत की गई थी. पुलिस ने 14 मार्च, 2024 को यह शिकायत दर्ज की थी.बाद में शिकायतकर्ता की मृत्यु हो गई, वो बीमारी से जूझ रही थीं.
