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PM मोदी की WFH अपील के बाद बेंगलुरु में फिर छिड़ी ट्रैफिक बनाम वर्क फ्रॉम होम बहस

Bengaluru को देश का आईटी हब माना जाता है, जहां लाखों लोग बड़ी टेक कंपनियों में काम करते हैं। लेकिन शहर की पहचान अब भारी ट्रैफिक जाम से भी जुड़ गई है। रोजाना घंटों तक जाम में फंसने की समस्या से परेशान लोगों के बीच अब एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम को लेकर बहस तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा वैश्विक तेल संकट और ईंधन बचत को लेकर वर्क फ्रॉम होम का जिक्र किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बेंगलुरु के युवाओं और आईटी कर्मचारियों की प्रतिक्रियाएं तेजी से वायरल हो रही हैं।

कई कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहर में ऑफिस पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। कुछ लोगों का कहना है कि रोजाना 15 से 20 किलोमीटर का सफर तय करने में भी डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। वहीं शाम को घर लौटते समय भी यही स्थिति बनी रहती है।

आईटी प्रोफेशनल्स का कहना है कि ट्रैफिक में रोजाना कई घंटे बर्बाद होने से उनकी निजी जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। कुछ यूजर्स ने लिखा कि कोरोना काल के दौरान जब वर्क फ्रॉम होम लागू था, तब जिंदगी कहीं ज्यादा आसान और तनावमुक्त थी।

कोविड महामारी के समय अधिकांश कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी थी। उस दौरान शहर की सड़कों पर ट्रैफिक काफी कम हो गया था और लोगों का समय व पैसा दोनों बच रहा था। लेकिन अब कंपनियों के दोबारा ऑफिस बुलाने के बाद ट्रैफिक का दबाव फिर बढ़ गया है।

वर्क फ्रॉम होम को लेकर कंपनियों की राय अलग-अलग है। कुछ कंपनियां मानती हैं कि ऑफिस में काम करने से टीमवर्क और निगरानी बेहतर होती है, जबकि कई कंपनियां हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं, जिसमें कर्मचारी कुछ दिन घर से और कुछ दिन ऑफिस से काम करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ट्रैफिक में फंसे रहने से मानसिक तनाव, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। वहीं सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बेंगलुरु में लोग ऑफिस से ज्यादा समय ट्रैफिक में बिताते हैं।

कई यूजर्स का मानना है कि बड़े शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है, खासकर आईटी सेक्टर जैसी नौकरियों में।

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