भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता होने से वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है। अप्रैल 2025 से जारी टैरिफ विवाद का अब समाधान हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद भारत में शेयर बाजार में उछाल आया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ।
समझौते का विवरण
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अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने की घोषणा की है।
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यह डील अप्रैल 2025 से शुरू हुए व्यापार विवाद का अंतिम समाधान है।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमसे बात की। दोनों नेताओं ने व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
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प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए संसदीय दल की बैठक में कहा कि भारत ने धैर्य रखा और इसका परिणाम सामने है।
भारत को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
विश्लेषकों के अनुसार, भारत इस डील से सबसे अधिक लाभ में है।
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चीन और पाकिस्तान के मुकाबले अब भारत पर अमेरिकी टैरिफ कम है।
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इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम पर अब 20% टैरिफ है, जबकि भारत पर 18% टैरिफ रहेगा।
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भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने का वादा किया है, जिसे संभावित रूप से शून्य तक लाया जा सकता है।
बाजार और उद्योगों पर असर
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इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लैपटॉप और गैजेट्स की कीमतें भारत में कम हो सकती हैं।
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अमेरिका से टैरिफ कम होने से टैक्स्टाइल, आभूषण, चमड़ा, फुटवियर, केमिकल और मशीनरी उद्योग को निर्यात में फायदा होगा।
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उद्योग जगत का मानना है कि इससे विश्वास और निवेश बढ़ेगा, और FII निवेशकों की वापसी से बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा।
अर्थव्यवस्था और भविष्य
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विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।
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डील से भारत की GDP वृद्धि 6.9% तक बढ़ सकती है।
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टैरिफ कटौती से निवेश, रोजगार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक संतुलन में सुधार होगा।
