जयपुर। राजस्थान की साइबर सेल ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि आतंकी संगठन ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बच्चों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। रोब्लॉक्स, माइनक्राफ्ट और डिस्कॉर्ड जैसे लोकप्रिय गेम्स और चैट ऐप्स पर बच्चों को टारगेट किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल शिकारी बच्चों से दोस्ती कर उन्हें धीरे-धीरे गलत रास्ते पर ले जाते हैं। 11 से 17 साल के बच्चे इस खतरे के सबसे ज्यादा शिकार हैं। विशेषकर सैंडबॉक्स गेम्स में खुली चैट और ज्यादा फ्रीडम होने के कारण बच्चे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
बच्चों को फंसाने की रणनीति
साइबर सेल की रिपोर्ट में तीन स्टेप की खतरनाक रणनीति सामने आई है:
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गेमिंग चैट रूम में दोस्ती करना – पहले बच्चों के साथ गेम के माध्यम से दोस्ती की जाती है।
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निजी चैट पर शिफ्ट करना और छोटे टास्क देना – बच्चों को धीरे-धीरे व्यक्तिगत चैट पर लाया जाता है और छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं।
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गेम के बहाने मिशन देना और कंट्रोल करना – अंत में बच्चे को अपने नियंत्रण में ले लिया जाता है और ब्रेनवॉश की कोशिश की जाती है।
DIG विकास कुमार की चेतावनी
साइबर सेल के DIG विकास कुमार ने बताया कि ये संगठन बच्चों को इस तरह बहकाते हैं कि उन्हें खुद भी समझ नहीं आता कि वे किस जाल में फंसे हैं। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों के मोबाइल ऐप्स, गेमिंग गतिविधियों और स्क्रीन टाइम पर नजर रखें, ताकि उन्हें ऐसे अपराधियों से बचाया जा सके।
बीजेपी विधायक ने जताई चिंता
बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि बदलते समय में बच्चों की मानसिकता प्रभावित हो रही है। मारधाड़ और हिंसक गेम्स में बच्चों की रुचि बढ़ रही है, और कई बार गेमिंग के माध्यम से वे गलत रास्ते पर चले जाते हैं। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह किया कि बच्चों के गेमिंग समय और मानसिक विकास पर खास ध्यान दें।
स्क्रीन टाइम और मॉनिटरिंग जरूरी
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि बच्चों को इस खतरे से बचाने के लिए:
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स्क्रीन टाइम कंट्रोल करना,
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गेमिंग ऐप्स की मॉनिटरिंग,
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बच्चों से नियमित बातचीत
जैसे उपाय बेहद जरूरी हैं। इन तरीकों से बच्चों को डिजिटल शिकारी और आतंकियों के जाल में फंसने से रोका जा सकता है।
