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Abhishek Manu Singhvi का केंद्र पर हमला, बोले– विरोध को देशद्रोह बताना चिंताजनक

कांग्रेस सांसद Abhishek Manu Singhvi ने एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन और एनसीईआरटी किताब विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक प्रदर्शन के खिलाफ जिस तरह की पुलिस कार्रवाई हो रही है, वह बेहद चिंताजनक है।

सिंघवी ने कहा कि Bharat Mandapam कोई निजी संपत्ति नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थल है। ऐसे में यदि कोई जवाबदेही मांगता है तो उसे देशद्रोह नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों का पुलिस पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था और न ही ऐसा कोई प्रमाण है।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोका जा रहा’

सिंघवी ने कहा कि युवाओं ने पेपर लीक जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई, लेकिन बदले में उन्हें लाठियां मिलीं। उन्होंने कहा कि उन पर और छात्रों पर गंभीर धाराएं लगाई गईं, मानो आतंकवाद या देशद्रोह जैसा कोई अपराध हुआ हो, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था।

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के बयान का हवाला देते हुए सिंघवी ने कहा कि आज सत्ता के खिलाफ बोलने को देश के खिलाफ बोलना बताया जा रहा है।

एनसीईआरटी विवाद पर भी उठाए सवाल

एनसीईआरटी की किताबों में विवादित अध्याय को लेकर सिंघवी ने कहा कि वह इस मामले में अदालत में पेश हो चुके हैं और जो कहना था, कोर्ट में कहा है। उनका तर्क है कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका से जुड़े विषयों को आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में जिस तरह पेश किया जा रहा है, उस पर गंभीर बहस होनी चाहिए।

‘असहमति को साजिश बताया जा रहा’

सिंघवी ने आरोप लगाया कि देश को ऐसी दिशा में ले जाया जा रहा है, जहां असहमति को साजिश और देशद्रोह का नाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई संवैधानिक तरीके से विरोध करता है तो उसके खिलाफ मुकदमे और कार्रवाई लगभग तय मानी जाती है।

उन्होंने महिला पहलवानों के आंदोलन और अन्य विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय की मांग को भी व्यवस्था के लिए असुविधा मान लिया जाता है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस सांसद ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

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