इस्लामिक कैलेंडर के रमजान महीने का हर दिन पाक और मुकद्दस माना जाता है। लेकिन रमजान के आखिरी 10 दिनों में आने वाली शब-ए-कद्र की रात सबसे पवित्र मानी जाती है। यह रात हर मुसलमान के लिए विशेष महत्व रखती है।
शब-ए-कद्र के अन्य नाम
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अरबी: लैलातुल क़द्र
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अंग्रेजी: Night of Decree, Night of Power, Night of Value
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अन्य नाम: भाग्य की रात, मुकद्दस की रात
शब-ए-कद्र 2026 की तारीख
रमजान की 27वीं रात को आमतौर पर शब-ए-कद्र माना जाता है।
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रमजान 2026 की शुरुआत: 19 फरवरी 2026
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शब-ए-कद्र की संभावित मुख्य रात: 16 मार्च 2026
इसके अलावा, रमजान के आखिरी 10 दिनों की विषम रातें (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं) भी शब-ए-कद्र मानी जाती हैं।
शब-ए-कद्र का महत्व
इस रात की खासियत यह है कि कुरान की आयतें पहली बार पैगंबर मोहम्मद पर जिब्रिल फरिश्ते के माध्यम से उतरी थीं। इस रात की इबादत हजारों सालों की इबादत के बराबर मानी जाती है।
कुरान में इसका उल्लेख सूरह क़द्र में किया गया है:
“निःसंदेह, हमने क़ुरआन को शबे क़द्र की रात में उतारा और तुम्हें क्या पता शबे क़द्र की रात कैसी होती है? शबे क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। उसमें फ़रिश्ते और रूह अपने रब की अनुमति से हर काम के लिए उतरते हैं। वे सुबह होने तक शांति की रात होती है।”
— कुरान | 97:1-5
शब-ए-कद्र की रात मुस्लिम क्या करते हैं
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पूरी रात नमाज और कुरान तिलावत करते हैं।
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अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगते हैं।
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तरावीह और तहज्जुद की नमाज पढ़ी जाती है।
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कुरान शरीफ की तिलावत, हदीस की आयतें, पारा और नफ्ल की नमाज भी पढ़ी जाती हैं।
