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योगी सरकार में ‘जीरो टॉलरेंस’ का असर, यूपी में दंगाइयों के मंसूबे हुए नाकाम

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्त कानून व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट में भी दिखाई देने लगा है। कभी ‘दंगा प्रदेश’ कहलाने वाला उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों में बड़े दंगों से पूरी तरह मुक्त रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन औसतन 19 दंगे होते थे, लेकिन वर्ष 2017 के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। योगी सरकार के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश जरूर की, लेकिन पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने दंगों को बढ़ने से पहले ही रोक दिया।

एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत 2.2 से काफी कम है। सरकार का दावा है कि यह आंकड़ा उन मामलों का है, जहां दंगा भड़काने की कोशिशों को समय रहते विफल कर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर सार्वजनिक मंचों से कहते हैं — “नो कर्फ्यू, नो दंगा… यूपी में सब चंगा।” सरकार का कहना है कि यही नीति अब प्रदेश की नई पहचान बन चुकी है।

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