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अब स्कूलों में पढ़ाई के साथ भारतीय भाषाओं और साइन लैंग्वेज की भी सीख देंगे योगी सरकार के शिविर सबहेडिंग

लखनऊ, 10 मई। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे भारतीय संस्कृति, संवाद कौशल और सामाजिक समावेश से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में 13 से 19 मई तक प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’ आयोजित किया जाएगा। इस विशेष शिविर में बच्चों को भारतीय भाषाओं के साथ-साथ इंडियन साइन लैंग्वेज (आईएसएल) की भी बुनियादी जानकारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति-2020 के विजन को लागू करते हुए प्रदेश सरकार बहुभाषावाद और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। शिविर के दौरान छात्र-छात्राएं अपनी मातृभाषा के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं से परिचित होंगे और संवाद कौशल को बेहतर बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। पहली बार शिविर में इंडियन साइन लैंग्वेज को शामिल कर बच्चों को सांकेतिक संवाद की व्यवहारिक जानकारी भी दी जाएगी।

शासन की ओर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारियों को शिविर की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य बच्चों को भाषाई विविधता, सांस्कृतिक समरसता और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ना है, ताकि उनमें राष्ट्रीय एकता और आपसी संवाद की भावना मजबूत हो सके।

शिविर के माध्यम से छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान और बहुभाषावाद की समझ विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी भी है।

वहीं, इंडियन साइन लैंग्वेज को शामिल करना समावेशी शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016 के अनुरूप बच्चों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक किया जाएगा। एससीईआरटी द्वारा पीएम ई-विद्या चैनल के माध्यम से साइन लैंग्वेज से जुड़ी शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों लाभान्वित हो सकेंगे।

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