Twisha Sharma की संदिग्ध मौत का मामला अब Supreme Court of India पहुंच गया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल उस समय गंभीर हो गया, जब सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि “बेटी का तलाक होना कहीं बेहतर है, बजाय इसके कि परिवार को उसकी लाश उठानी पड़े।”
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और जांच में लापरवाही को लेकर दायर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मामले में चल रहे मीडिया ट्रायल और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अपुष्ट कहानियों पर सख्त नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों पक्षों के परिवार, आरोपी और संभावित गवाह मीडिया में किसी भी तरह का बयान या इंटरव्यू नहीं देंगे। अदालत ने कहा कि सभी पक्ष अपनी बात केवल जांच एजेंसी के सामने रखें ताकि निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता Siddharth Dave ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा दर्ज गवाहों के बयान मीडिया में लीक किए जा रहे हैं। इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि मुख्य आरोपी की मां, जो पूर्व जिला जज रह चुकी हैं, लगातार टीवी चैनलों पर जाकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं।
वहीं पीड़ित परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Siddharth Luthra ने शुरुआती जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की और जरूरी सबूत सुरक्षित रखने में लापरवाही बरती।
इस बीच All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) के डॉक्टरों की विशेष टीम ने भोपाल पहुंचकर ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमार्टम किया है। परिवार ने पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था।
