Lucknow के International Buddhist Research Institute में तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव की शुरुआत हुई। संस्कृति और रंगमंच प्रेमियों के लिए आयोजित इस महोत्सव को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली का सहयोग प्राप्त है। आयोजन Akanksha Theatre Arts द्वारा किया जा रहा है।
महोत्सव के पहले दिन प्रसिद्ध नाटक ‘कांच के खिलौने’ का मंचन किया गया। यह नाटक अमेरिकी लेखक Tennessee Williams की मूल रचना पर आधारित है, जिसका रूपांतरण सौरभ श्रीवास्तव ने किया। नाटक का निर्देशन अवध संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी Abla Bose ने किया।
मध्यमवर्गीय परिवार के संघर्षों की मार्मिक कहानी
नाटक की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें मां, बेटा और बेटी अपने संघर्षों, अधूरे सपनों और टूटते रिश्तों के बीच जीवन को संभालने की कोशिश करते हैं। कलाकारों ने आर्थिक तंगी, भावनात्मक दूरी और पारिवारिक संवेदनाओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया।
नाटक में ‘कांच के खिलौने’ को मानवीय भावनाओं और रिश्तों की नाजुकता के प्रतीक के रूप में दिखाया गया। संवाद, संगीत और मंच सज्जा ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कई भावुक दृश्यों के दौरान सभागार में गहरी शांति देखने को मिली।
लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान को मिला नया आयाम
महोत्सव में रंगकर्मियों और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में Dr. R.K. Singh मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
आयोजन से जुड़े आलोक कुमार पाण्डेय और बी.एन. ओझा ने बताया कि अगले दो दिनों में भी विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटकों का मंचन किया जाएगा। उनका कहना है कि यह नाट्य महोत्सव लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का प्रयास है।
