योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि प्रदेश की जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जेल प्रणाली में आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और सुधारात्मक गतिविधियों को और मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ‘ओपन जेल’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि छोटे अपराधों में बंद कैदियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। वहीं, केवल पेशेवर अपराधियों और माफिया को ही सामान्य जेलों में रखा जाए। उन्होंने 75 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों, गंभीर रोगियों, बच्चों के साथ बंद महिला कैदियों और जमानत राशि न जमा कर पाने वाले बंदियों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में जेलों की स्थिति में सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में जहां ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी, वह घटकर अब 1.03 हो गई है। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है, जबकि बंदियों की संख्या 79,782 है।
कारागार विभाग की ओर से बताया गया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब तक 6200 सीसीटीवी कैमरे, 30 ड्रोन कैमरे, बॉडी वॉर्न कैमरे, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयों की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बंदियों के पुनर्वास के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ाया जाए। प्रदेश की कई जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत सिलाई, काष्ठ कला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट और अन्य उत्पादन कार्य चल रहे हैं, जिससे बंदियों को रोजगार और प्रशिक्षण मिल रहा है।
इसके अलावा जेल परिसरों में योग, खेल, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां 1265 गोवंश संरक्षित हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों में कृषि उत्पादन और अन्य गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है। साथ ही विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुधारात्मक दृष्टिकोण के साथ जेलों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जाए, ताकि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
