दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में झारखंड के बोकारो की रहने वाली 26 वर्षीय इंजीनियर श्रुतिका बरनवाल की भी दर्दनाक मौत हो गई। जिस बेटी को माता-पिता ने बेहतर भविष्य और करियर के सपनों के साथ घर से दूर भेजा था, वह इस बार घर तो लौटी, लेकिन सफेद कफन में लिपटी हुई।
बोकारो जिले के जैना मोड़ भूचुनगडीह रोड निवासी श्रुतिका बरनवाल मुंबई की एक निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थीं। नौकरी के सिलसिले में उन्हें अक्सर दिल्ली आना पड़ता था। इस बार भी वह कंपनी के एक प्रोजेक्ट और आधिकारिक कार्य के लिए दिल्ली पहुंची थीं और कार्यालय के नजदीक होने के कारण मालवीय नगर के फ्लरिश स्टे होटल में ठहरी हुई थीं।

एक महीने पहले जॉइन की थी नई नौकरी
श्रुतिका के पिता प्रसाद बरनवाल ने बताया कि उनकी बेटी ने करीब एक महीने पहले ही नई नौकरी शुरू की थी। पहली सैलरी मिलने के बाद वह बेहद उत्साहित थी और अपने भविष्य को लेकर कई सपने देख रही थी। काम की जिम्मेदारियों के चलते उसका मुंबई और दिल्ली के बीच लगातार आना-जाना लगा रहता था।
परिजनों के अनुसार, वह होटल में इसलिए रुकी थीं ताकि अगले दिन समय पर अपने कार्यस्थल पहुंच सकें। लेकिन गुरुवार को होटल में लगी आग ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजन इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। पड़ोसी और रिश्तेदार लगातार परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन माता-पिता को इस बात का गहरा दुख है कि अब उनकी बेटी की हंसी और आवाज कभी घर में सुनाई नहीं देगी।
होटल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
श्रुतिका के परिजनों ने होटल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि घटना के समय सुरक्षा इंतजाम बेहतर होते और आग लगने के बाद तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
परिवार ने हादसे के लिए होटल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
