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6G पर अपग्रेड करना नहीं होगा आसान, कंपनियों को खरीदना पड़ सकता है महंगा हार्डवेयर

अगर आप 6G नेटवर्क का इंतजार कर रहे हैं और सोचते हैं कि यह 5G की तरह एक आसान अपग्रेड होगा, तो ऐसा नहीं है। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक 6G पर शिफ्ट होना टेलीकॉम कंपनियों के लिए काफी महंगा और चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

शुरुआती दौर में माना जा रहा था कि 6G, 5G का ही एडवांस्ड वर्जन होगा और इसके लिए बड़े स्तर पर हार्डवेयर बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट ग्लासेस और नई डिजिटल टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने स्थिति बदल दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एरिक्सन और नोकिया जैसी टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि 6G नेटवर्क को सफल बनाने के लिए ऑपरेटर्स को नए और महंगे हार्डवेयर में निवेश करना पड़ेगा। इससे टेलीकॉम कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 6G नेटवर्क के लिए 6GHz और 7GHz जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी बैंड्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ये सिग्नल अधिक डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन उनकी रेंज कम होती है और वे दीवारों जैसी बाधाओं को आसानी से पार नहीं कर पाते। इस समस्या से निपटने के लिए कंपनियों को नए एंटीना, बीमफॉर्मिंग रेडियो और उन्नत नेटवर्क उपकरण लगाने होंगे।

इसके अलावा, 6G की सबसे बड़ी चुनौती 5G स्टैंडअलोन (SA) कोर नेटवर्क को माना जा रहा है। 6G की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए ऑपरेटर्स के पास आधुनिक 5G SA कोर होना जरूरी होगा। भारत में इसका विस्तार धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन दुनिया के कई देशों में अभी भी 4G आधारित नेटवर्क के जरिए 5G सेवाएं दी जा रही हैं।

ऐसे में जो कंपनियां अभी तक 5G स्टैंडअलोन कोर पर अपग्रेड नहीं कर पाई हैं, उनके लिए 6G की राह और मुश्किल हो सकती है। यही कारण है कि अब केवल सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए 6G पर जाने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

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