राजधानी में अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर निगम जहां छोटे दुकानदारों और ठेला-खोमचा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करता नजर आता है, वहीं बड़े कार बाजार संचालकों पर प्रशासन की नरमी सवालों के घेरे में है। ताजा मामला नगर निगम जोन-4 के कैलाश कुंज क्षेत्र का है, जहां अवैध कार बाजार संचालकों ने सार्वजनिक जमीन, सड़क और फुटपाथों पर कब्जा जमा रखा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एचएएल पुलिस चौकी के ठीक बगल में संचालित हो रहे इस कार बाजार में बड़ी संख्या में चार पहिया वाहन खरीद-फरोख्त के लिए सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर खड़े किए जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने वाले लोगों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
आदेश के बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
मामले को लेकर जोन-4 की जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी ने स्वीकार किया कि संबंधित कार बाजार अवैध रूप से संचालित हो रहा है। उन्होंने कार बाजार संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह गई। नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर केवल अतिक्रमण हटाने की घोषणा की, जबकि अवैध कब्जों को हटाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
कार्रवाई से क्यों बच रहे कर्मचारी?
सूत्रों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने के दौरान विरोध और दबाव की आशंका के चलते कर्मचारी भी सख्त कार्रवाई से बचते हैं। बताया जाता है कि कई बार प्रभावशाली लोगों की सिफारिशें और फोन कार्रवाई में बाधा बन जाते हैं। वहीं, कर्मचारियों का यह भी कहना है कि किसी विवाद की स्थिति में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती, जिससे वे असहज महसूस करते हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस चौकी के बगल में ही खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है और उस पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो शहर के अन्य इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से अवैध कार बाजार के खिलाफ तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
