मेरठ: छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर हुआ प्रदर्शन बुधवार को हिंसक हो गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया है और हिंसा के पीछे कथित मुख्य साजिशकर्ता का भी खुलासा किया है।
पुलिस के अनुसार, इस बवाल का मुख्य सूत्रधार अमरोहा का जिला बदर अपराधी दिग्विजय सिंह भाटी है। उसके साथ रवि गौतम, सुशील गौतम और हिमांशु सिद्धार्थ के खिलाफ थाना सिविल लाइन में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का दावा है कि दिग्विजय भाटी के खिलाफ पहले से नौ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें धमकी, गुंडागर्दी, टोल कर्मचारियों से मारपीट और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। सुरक्षा कारणों से मुख्य गेट बंद कर दिया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस का कहना है कि समझाने के बावजूद रास्ता नहीं खोला गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और एंबुलेंस सहित कई वाहन जाम में फंस गए। इसके बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया।
हंगामे के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की हुई तथा पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। इस घटना में 11 पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने मौके से 50 से 60 लोगों को हिरासत में लिया और करीब 20 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें 13 नामजद आरोपी शामिल हैं।
इस बीच सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के वीडियो वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया है। एक वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस वाहन में बैठे एक अधिवक्ता को थप्पड़ मारने का दावा किया जा रहा है। इस वीडियो को लेकर विपक्ष ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे का कहना है कि कुछ लोगों ने प्रदर्शन की आड़ में जिले का माहौल खराब करने की कोशिश की। उनके अनुसार, प्रदर्शन का नेतृत्व ऐसे लोग कर रहे थे जिनके खिलाफ पहले से हत्या और जानलेवा हमले जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
क्या है मामला?
17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के गन्ने के खेत में बीए छात्रा ललिता गौतम का शव मिला था। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी अंकुश और उसके साथियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी को ललिता के किसी अन्य युवक से बातचीत करने का शक था, जिसके चलते विवाद हुआ और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। वहीं, विभिन्न संगठनों ने पूरे घटनाक्रम और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
