योगी सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। सरकार के अनुसार, बीते नौ वर्षों में पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी किसी भी मेधावी विद्यार्थी की पढ़ाई में बाधा न बने और छात्र विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सरकार ने ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं लागू की हैं। इसके जरिए पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है।
हर साल लाखों विद्यार्थियों को मिला लाभ
पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 4,16,860 अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को लाभ मिला। वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 4,39,647 हो गई।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत 2017-18 में 12,80,515 विद्यार्थियों को लाभ मिला था, जबकि 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर आगे बढ़ने में मदद मिल रही है। समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, छात्रवृत्ति व्यवस्था में किए गए सुधारों से विद्यार्थियों का शिक्षा के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। सरकार का प्रयास है कि हर पात्र विद्यार्थी को समय पर आर्थिक सहायता मिले, ताकि वह बिना आर्थिक बाधा के अपने भविष्य के सपनों को साकार कर सके।
