सावन माह के पहले दिन उत्तर प्रदेश के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष के बीच कांवड़ यात्रा की शुरुआत पूरे उत्साह और आस्था के साथ हुई। हरिद्वार और उत्तराखंड से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों का यूपी सीमा पर स्वागत किया गया, जबकि काशी, अयोध्या और प्रयागराज समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।
प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती, चिकित्सा शिविर, पेयजल, विश्राम स्थल और सेवा शिविरों की व्यवस्था की गई है।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर बागपत जा रहे श्रद्धालु अभिषेक त्यागी ने यात्रा व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पूरे मार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं के कारण श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान कई प्रेरणादायक दृश्य भी देखने को मिले। हरियाणा के कैथल से आए 11 वर्षीय बाल कांवड़िए ने हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल लेकर अपनी यात्रा शुरू की। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में पुलिसकर्मियों ने उसके साथ कुछ दूरी तक पैदल चलकर उसका उत्साह बढ़ाया।
मेरठ सहित कई जिलों में सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां कांवड़ियों के लिए भोजन, पेयजल और विश्राम की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक दिन-रात श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हैं।
उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश सीमा पर बनाए गए स्वागत द्वारों को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां कांवड़ियों का स्वागत किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
