लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के 7.5 लाख रुपये के रिश्वत कांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। विजिलेंस और एलडीए सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार कथित बिचौलिया श्रवण कुमार पहले से ही एनआरआई कारोबारी जितेंद्र नारायण को निशाना बना रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि बाराबंकी में वसूली की कोशिश नाकाम होने के बाद लखनऊ स्थित कारोबारी की व्यावसायिक संपत्ति को निशाना बनाया गया और कथित तौर पर IGRS शिकायत के जरिए दबाव बनाकर रिश्वत मांगने की साजिश रची गई।
सूत्रों के मुताबिक, बाराबंकी में निर्माण कार्य के दौरान कारोबारी से कथित वसूली की कोशिश सफल नहीं हुई। इसके बाद इंदिरानगर स्थित नारायण सिटी की करीब 10 हजार वर्गफीट में बनी व्यावसायिक परियोजना को निशाना बनाया गया। आरोप है कि IGRS पर शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई का डर दिखाया गया और पहले 15 लाख रुपये की मांग की गई। बाद में सौदा 7.5-7.5 लाख रुपये की दो किश्तों में तय हुआ।

विजिलेंस ने पहली किश्त लेते समय एलडीए के जेई दिनेश कुमार वर्मा, पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश और कथित बिचौलिया श्रवण कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
IGRS शिकायतों के पैटर्न की भी जांच
जांच में सामने आया है कि श्रवण कुमार ने प्रवर्तन जोन-5 में तैनात जेई और अन्य कर्मचारियों से संपर्क करने के बाद IGRS पर शिकायत दर्ज कराई थी। अब विजिलेंस यह जांच कर रही है कि क्या शिकायत प्रणाली का इस्तेमाल अवैध वसूली के लिए किया जा रहा था।
एलडीए की आंतरिक समीक्षा में भी कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पिछले एक वर्ष में सिर्फ 28 लोगों ने 2,114 शिकायतें दर्ज कराईं, जबकि 48 शिकायतकर्ताओं का पैटर्न भी संदिग्ध पाया गया है। एलडीए इन मामलों की अलग से जांच कराने और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
पुरानी फाइलें और नेटवर्क की पड़ताल
विजिलेंस ने एलडीए से अवैध निर्माण से जुड़ी मूल फाइलें, नक्शे, नोटशीट और जांच रिपोर्ट तलब की हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि किन मामलों में शिकायतें वास्तविक थीं और किनका इस्तेमाल कथित तौर पर वसूली के लिए किया गया।
जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों की कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन और IGRS शिकायतों के पैटर्न का भी मिलान कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे।
दामाद के मामले की भी हो रही पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि गिरफ्तार पंप ऑपरेटर चंद्र प्रकाश का दामाद भी एक अलग घूसखोरी के मामले में जेल में है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विजिलेंस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि दस्तावेजों की पड़ताल और पूछताछ के दौरान इसी तरह के कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।
