उत्तर प्रदेश में अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को राहत नहीं मिलेगी। मंगलवार को विधानसभा में उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक-2026 पारित कर दिया गया। इसके लागू होने के बाद मोटर वाहन अधिनियम के तहत दर्ज चालान और मुकदमे स्वतः समाप्त नहीं होंगे।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को एक याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से कहा था कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित दंड को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद राज्य सरकार ने कानून में संशोधन का फैसला लिया।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में सरकार ने 2017 से 2021 के बीच यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े करीब 11 लाख चालान और मुकदमों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए संशोधन विधेयक सदन में पेश किया, जिसे अब पारित कर दिया गया है।
अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि किसी वाहन चालक पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया गया और निर्धारित समय तक उसका भुगतान नहीं किया गया, तो कुछ मामलों में मुकदमा स्वतः समाप्त हो जाता था। लेकिन नए संशोधन के बाद ऐसा नहीं होगा। अब नियम तोड़ने वालों को जुर्माना भरना ही होगा और जिन मामलों में सजा का प्रावधान है, उनमें कानूनी कार्रवाई भी जारी रहेगी। इससे संबंधित प्रस्ताव को पहले ही राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी थी।
