न्यूज डेस्क, प्रयागराज
प्रयागराज। प्रयागराज में अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के सम्मान में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम बदलने की मांग तेज होती जा रही है। अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के ऐतिहासिक बलिदान को सम्मान दिलाने की मांग को लेकर प्रयागराज में कई स्थानों पर पोस्टर लगाए गए हैं।
पोस्टरों में स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम बदलकर “अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय” करने की मांग उठाई गई है। यह मांग महुआ डाबर संग्रहालय परिवार की ओर से की गई है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का समर्थन मिल रहा है।
‘काकोरी के नायक ठाकुर रोशन सिंह का सम्मान करो’
प्रयागराज में लगाए गए इन पोस्टरों में ठाकुर रोशन सिंह की तस्वीर के साथ लिखा गया है, “काकोरी के नायक ठाकुर रोशन सिंह का सम्मान करो।” पोस्टर में लिखा है, “आजादी के नायकों को किया गया दरकिनार, सम्मान देने में आगे किया अपना परिवार।” पोस्टर में ठाकुर रोशन सिंह की तस्वीर लगाई गई है। प्रयागराज में इस तरह के पोस्टर कई स्थानों पर लगाए गए हैं। इस मांग को लेकर हो रहे धरना-प्रदर्शन में लोगों से समर्थन भी मांगा गया है।
इस मांग का सबसे बड़ा आधार ठाकुर रोशन सिंह और मौजूदा अस्पताल परिसर का ऐतिहासिक संबंध बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, जिस जगह आज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थित है, वहीं ब्रिटिश शासन के दौरान मलाका जेल हुआ करती थी। बाद में नैनी जेल स्थापित कर दी गई।
काकोरी ट्रेन कांड के नायक ठाकुर रोशन सिंह को मलाका जेल में रखा गया था और 19 दिसंबर 1927 को उन्हें फांसी दी गई थी। इसी आधार पर महुआ डाबर संग्रहालय परिवार ने मांग उठाई है कि SRN अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए।
कौन थे ठाकुर रोशन सिंह?
ठाकुर रोशन सिंह का जन्म 22 जनवरी 1892 को शाहजहांपुर के नवादा गांव में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई। असहयोग आंदोलन के बाद वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े। यह वही संगठन था, जिसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति का रास्ता अपनाया।
9 अगस्त 1925 को काकोरी के पास सरकारी खजाना ले जा रही ट्रेन को क्रांतिकारियों ने रोककर सरकारी धन लूटा था। इस कार्रवाई को काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से जाना गया। अंग्रेजी सरकार ने ठाकुर रोशन सिंह को HRA से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में मानते हुए काकोरी षड्यंत्र मामले में अभियुक्त बनाया था। मुकदमे के बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।
19 दिसंबर 1927 को प्रयागराज की तत्कालीन मलाका जेल में ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दे दी गई।
वर्षों से उठ रही है नाम बदलने की मांग
महुआ डाबर संग्रहालय परिवार लंबे समय से स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किए जाने की मांग उठाता रहा है। संग्रहालय परिवार का कहना है कि जिस स्थान का संबंध उनके बलिदान से सीधे जुड़ा है, वहां उनके नाम को प्रमुखता मिलनी चाहिए।
अब प्रयागराज के अलग-अलग स्थानों पर पोस्टर लगाए जाने के बाद यह मांग एक बार फिर चर्चा में है। संग्रहालय परिवार का कहना है कि ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए इस ऐतिहासिक स्थल को उनके नाम से जोड़ा जाना जरूरी है।
