रिपोर्ट- अंकित पाण्डेय
हमीरपुर। नाग पंचमी के अवसर पर हमीरपुर के मेरापुर स्थित प्रसिद्ध संगमेश्वर मंदिर के पास बुंदेलखंड की सदियों पुरानी लोक परंपरा देखने को मिली। यमुना किनारे बड़ी संख्या में युवतियों और महिलाओं ने कपड़े से गुड़िया बनाकर पारंपरिक तरीके से उसे कूटा और बाद में यमुना नदी में प्रवाहित किया।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी के दिन गुड़िया कूटने की रस्म से घर-परिवार की बुराई, नकारात्मकता और अनिष्ट दूर होते हैं। इसके साथ ही सुख-समृद्धि और भाई-बहन के रिश्तों में मजबूती आने की भी मान्यता है।

पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
आधुनिकता के दौर में भी बुंदेलखंड की यह लोक परंपरा आज तक कायम है। मेरापुर में हर साल नाग पंचमी के मौके पर महिलाएं और युवतियां उत्साह के साथ इस रस्म को निभाती हैं। इस दौरान संगमेश्वर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी और लोगों ने पूजा-अर्चना के साथ लोक परंपरा में हिस्सा लिया।
स्थानीय निवासी श्रुति शुक्ला ने बताया कि नाग पंचमी पर गुड़िया बनाकर उसे पारंपरिक तरीके से कूटने और यमुना में प्रवाहित करने की परंपरा उनके परिवार और क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी इस संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाती रहेंगी।यह अनोखी रस्म बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था की पहचान मानी जाती है।
