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शिमला में यूनिवर्सिटी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, 25-27% फीस वृद्धि का विरोध

रिपोर्ट- प्रिया बाजपेयी शुक्ला

शिमला। दिल्ली और झारखंड के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई श्रेणियों में फीस में 25 से 27 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का आरोप लगाया है।

छात्रों का कहना है कि नॉन-सब्सिडाइज्ड कोर्स, परीक्षा शुल्क, एडमिशन और पीएचडी से जुड़ी फीस में बढ़ोतरी की गई है। इसके विरोध में छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन कर फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की।

फीस बढ़ोतरी के साथ छात्र संघ चुनाव की भी मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में फीस वृद्धि वापस लेना और छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू करना शामिल है। छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में पहले से ही छात्रों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में फीस में इतनी बड़ी बढ़ोतरी छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।

SFI HPU के कैंपस प्रेसिडेंट आशीष चौहान ने कहा कि फीस बढ़ोतरी वापस होने तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने नॉन-सब्सिडाइज्ड कोर्स, परीक्षा शुल्क और पीएचडी फीस में बढ़ोतरी का विरोध किया। साथ ही नए नियुक्त प्रोफेसरों को हटाने की मांग भी रखी।

नई बैच से लागू करने की मांग

छात्र नेता अमन अदिति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने एडमिशन और अन्य विभागीय शुल्क में 25 से 27 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। छात्रों का कहना है कि यदि फीस बढ़ाना जरूरी है तो इसे नए बैच से लागू किया जाए, ताकि पुराने बैच के छात्रों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

छात्रों ने कहा कि फीस इतनी बढ़ाई जानी चाहिए, जिसे आम छात्र आसानी से वहन कर सकें। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, ऐसे में फीस वृद्धि का फैसला छात्रों के हित में नहीं है।

मानसून सत्र से पहले बढ़ा छात्र दबाव

छात्रों का यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले हो रहा है। राज्य में मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर तक प्रस्तावित है। ऐसे में छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर छात्रों की ओर से राजभवन घेराव जैसे आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

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