रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी और शिक्षण संस्थानों में व्यवस्थाओं को लेकर छात्र-छात्राओं के बढ़ते प्रदर्शनों ने सरकार का ध्यान खींचा है। कन्नौज, आजमगढ़, महोबा, हमीरपुर, उन्नाव और लखनऊ समेत कई जिलों में शिक्षकों की कमी और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर छात्रों की ओर से आवाज उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार की रणनीति अब केवल स्कूल-कॉलेजों की कमियां दूर करने तक सीमित नहीं रहेगी। सूत्रों के मुताबिक, जेनरेशन अल्फा के छात्र अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो प्रशासन का जोर कार्रवाई के बजाय संवाद पर रहेगा। ऐसे मामलों में युवा अधिकारियों को छात्रों के बीच भेजकर उनकी समस्याएं सुनने और समाधान की प्रक्रिया शुरू कराने की तैयारी है।
प्रदर्शन की स्थिति में छात्रों से संवाद करेंगे युवा अधिकारी
सरकार ने प्रशासन को संकेत दिए हैं कि किसी छात्र प्रदर्शन को सीधे कानून-व्यवस्था की समस्या मानने से पहले उसकी वजह समझी जाए। यदि किसी शिक्षण संस्थान में छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो वहां युवा अधिकारियों को भेजकर उनसे बातचीत कराई जा सकती है।
अधिकारियों को छात्रों के साथ सहज और दोस्ताना माहौल में संवाद करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि वे अपनी समस्याएं खुलकर बता सकें। संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी शुरू कराने की योजना है।

सरकार का उद्देश्य है कि छोटी समस्याएं समय रहते हल हों और वे बड़े आंदोलन का रूप न लें।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बल प्रयोग से बचने पर जोर
जेनरेशन अल्फा के प्रदर्शनों को लेकर पुलिस की भूमिका में भी बदलाव की तैयारी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों की स्थिति में पुलिस बल के इस्तेमाल से बचते हुए बातचीत के जरिए स्थिति संभालने पर जोर रहेगा।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को पहले छात्रों की शिकायत समझने और फिर संबंधित विभाग के माध्यम से समाधान कराने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। सरकार का मानना है कि शिक्षा, शिक्षक, स्कूल सुविधाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद के जरिए ज्यादा प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।
विभागवार नोडल अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
छात्रों के लगातार सामने आ रहे प्रदर्शनों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद शिक्षण संस्थानों की समस्याओं की निगरानी के लिए विभागवार नोडल अधिकारियों की व्यवस्था मजबूत किए जाने की तैयारी है।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण और श्रम विभाग के अधीन आने वाले शिक्षण संस्थानों की निगरानी के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इन अधिकारियों की भूमिका केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कमियां मिलने पर उनके समाधान की निगरानी भी करनी होगी। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सर्वोदय विद्यालयों में बच्चों से सीधे संवाद
सर्वोदय विद्यालयों की व्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार ने निगरानी का नया मॉडल तैयार किया है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने अधिकारियों को विद्यालयों में जाकर बच्चों से सीधे संवाद करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को विद्यालयों में रात में रुककर बच्चों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी लेने को कहा गया है। इसके अलावा स्कूलों में शिकायत पेटिकाएं भी रखी जाएंगी। इन पेटिकाओं को मुख्यालय स्तर पर खोलकर बच्चों की वास्तविक शिकायतों का आकलन किया जाएगा।
अधिकारियों को 25 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण मंत्री और प्रमुख सचिव समाज कल्याण के अलग-अलग जिलों में जाकर सर्वोदय विद्यालयों का निरीक्षण करने और छात्रों से संवाद करने की भी तैयारी है।
शिक्षकों की कमी पर भी सरकार की नजर
सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों की समय से तैनाती नहीं होने के मामले को भी गंभीरता से लिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होने के बावजूद कई जगह शिक्षकों की तैनाती में देरी को लेकर सवाल उठे हैं।
सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि जिन विद्यालयों में पहले से शिक्षकों की जरूरत थी, वहां भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया में देरी क्यों हुई। अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल शिकायतों की होगी तथ्यात्मक जांच
सरकारी स्कूलों से जुड़ी शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो को लेकर भी सरकार ने अधिकारियों को सतर्क किया है। मुख्य सचिव की ओर से मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली शिकायतों और दावों की तथ्यात्मक जांच कराई जाए।
यदि कोई सूचना गलत या भ्रामक पाई जाती है तो जांच के बाद वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखने के निर्देश हैं। वहीं, यदि वायरल वीडियो या पोस्ट में स्कूल की वास्तविक समस्या सामने आती है तो संबंधित विभाग को उसका समाधान भी कराना होगा।
बारिश के मौसम में स्कूलों का विशेष निरीक्षण
बारिश के दौरान सरकारी स्कूलों में जलभराव, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित कर विद्यालयों का निरीक्षण कराया जाएगा।
टीमें पठन-पाठन के साथ किचन शेड, बिजली के उपकरण, पेयजल, स्वच्छता और जलभराव की स्थिति की भी जांच करेंगी। कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को उनके निस्तारण की जिम्मेदारी दी जाएगी।
रिक्त पदों को भरने की तैयारी
छात्रों के प्रदर्शनों के बीच सरकार का एक बड़ा फोकस शिक्षण संस्थानों में खाली पड़े पदों को भरने पर भी है। शिक्षकों और अन्य जरूरी पदों की रिक्तियों को चिह्नित कर भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है।
छात्र प्रदर्शनों में शिक्षकों की कमी प्रमुख मुद्दों में सामने आई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि केवल संवाद से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक और जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
जल्द आ सकती है नई यूथ पॉलिसी
युवाओं और जेनरेशन अल्फा की बढ़ती मुखरता को देखते हुए सरकार व्यापक यूथ पॉलिसी लाने की तैयारी में भी है। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित नीति में शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और युवाओं की भागीदारी से जुड़े विषयों को शामिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को संस्थागत स्तर पर सुनने और उनके समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना है।
युवा आयोग के गठन पर भी विचार
युवाओं से जुड़े मुद्दों के लिए युवा आयोग के गठन पर भी विचार किया जा रहा है। संभावित आयोग में छात्रों और युवाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने की संभावना है।
इससे छात्रों को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे एक संस्थागत मंच पर रखने का अवसर मिल सकता है। सरकार का मानना है कि ऐसी व्यवस्था से छोटी समस्याओं को लेकर बार-बार सड़क पर प्रदर्शन की स्थिति को कम किया जा सकेगा।
पुलिस की भूमिका में बदलाव का संकेत
छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को लेकर पुलिस की भूमिका पर भी सरकार का विशेष फोकस है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसे मामलों में पुलिस को संयम बरतने और पहले बातचीत के जरिए स्थिति संभालने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार का संदेश साफ है—पहले छात्रों की बात सुनिए, समस्या समझिए और फिर समाधान की प्रक्रिया शुरू कीजिए। शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बल प्रयोग के बजाय संवाद को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई जा रही है।
