रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
पूर्व कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। समाचार एजेंसी एएनआई ने अस्पताल के सूत्रों के हवाले से उनके निधन की जानकारी दी है। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद भी रह चुके थे। हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन पर 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले का गहरा असर पड़ा। इस मामले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में हुई थी उम्रकैद
सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराया गया था। मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
1984 के दंगों के बाद दिल्ली में हिंसा के कई मामलों की जांच हुई थी। सज्जन कुमार के खिलाफ भी लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली। उनकी दोषसिद्धि को दिल्ली के राजनीतिक इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना जाता है।
कांग्रेस में लंबे समय तक रहे सक्रिय
सज्जन कुमार ने दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी। वह दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद रहे थे। इसके अलावा दिल्ली के राजनीतिक और संगठनात्मक मामलों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।
सांसद के रूप में उनका कार्यकाल दिल्ली की राजनीति के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा। हालांकि, 1984 के दंगों से संबंधित मुकदमे और बाद में हुई कानूनी कार्रवाई के चलते उनका राजनीतिक सफर विवादों से घिर गया।

दोषसिद्धि के बाद छोड़ी थी कांग्रेस
1984 के दंगा मामले में अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन लगभग समाप्त हो गया।
दंगों से जुड़े मामले में उनकी दोषसिद्धि लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय रही। पीड़ित परिवारों और विभिन्न संगठनों की ओर से मामले में न्याय की मांग लगातार उठती रही थी।
सफदरजंग अस्पताल में लाया गया शव
एएनआई ने अस्पताल के सूत्रों के हवाले से बताया कि सज्जन कुमार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। उनके निधन की परिस्थितियों और अन्य चिकित्सकीय जानकारी को लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। सज्जन कुमार का राजनीतिक जीवन जहां कांग्रेस में लंबे सक्रिय कार्यकाल के लिए जाना जाता है, वहीं 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले ने उनकी सार्वजनिक छवि और राजनीतिक विरासत को गहराई से प्रभावित किया।
