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एसजीपीजीआई में ग्रेड IV लिवर इंजरी से जूझ रहे 6 साल के बच्चे की सफल सर्जरी

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 6 वर्षीय बच्चे का सफल इलाज कर उसकी जान बचाई गई। बच्चे को ग्रेड IV लिवर इंजरी के साथ पेट में करीब दो लीटर खून जमा होने और लगातार आंतरिक रक्तस्राव की स्थिति में अस्पताल लाया गया था।

बिहार के गोपालगंज जिले के नवाडे पारसोनी गांव निवासी विक्रम के छह वर्षीय बेटे कृष्णा कुमार को 29 जुलाई 2026 को ई-रिक्शा की टक्कर से गंभीर चोटें आई थीं। हालत गंभीर होने पर उसे विशेषज्ञ ट्रॉमा उपचार के लिए एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। बच्चे को 1 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जांच में उसके लिवर में ग्रेड IV की गंभीर चोट पाई गई। पेट के अंदर करीब दो लीटर रक्त जमा था और घायल लिवर से लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल इमरजेंसी सर्जरी का निर्णय लिया।

इमरजेंसी सर्जरी से रोका गया रक्तस्राव

1 अगस्त को ट्रॉमा सर्जरी टीम ने बच्चे की आपातकालीन सर्जरी की। टीम में प्रोफेसर अमित कुमार सिंह, एडिशनल चीफ, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर और डॉ. आदित्य सिंह, सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी शामिल रहे।

सर्जरी का मुख्य उद्देश्य लगातार हो रहे आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित करना और गंभीर रूप से घायल लिवर को स्थिर करना था।

48 घंटे वेंटिलेटर पर रहा बच्चा

गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण बच्चे को सर्जरी के दौरान और बाद में विशेष एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर सपोर्ट की जरूरत पड़ी। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. गणपत प्रसाद, एडिशनल प्रोफेसर, डॉ. रफत शमीम, एडिशनल प्रोफेसर और डॉ. वंश प्रिया, एडिशनल प्रोफेसर शामिल रहे।

सर्जरी के बाद बच्चे को करीब 48 घंटे तक मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा गया। इसके बाद उसकी हालत में सुधार होने पर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की टीम ने इसके बाद भी बच्चे की लगातार निगरानी की।

अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान संभावित दोबारा ब्लीडिंग, संक्रमण, सांस लेने में परेशानी और अन्य जटिलताओं पर विशेष नजर रखी गई। मल्टीडिसिप्लिनरी सर्जिकल और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट के बाद कृष्णा कुमार को 19 अगस्त 2026 को संतोषजनक हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

गंभीर चोटों के इलाज में मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा केयर अहम

डॉक्टरों के मुताबिक, ग्रेड IV लिवर इंजरी और पेट के अंदर बड़े पैमाने पर रक्तस्राव बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है, खासकर छोटे बच्चों में। ऐसे मामलों में तत्काल जांच, समय पर सर्जरी, विशेषज्ञ ट्रॉमा सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट, वेंटिलेटर मैनेजमेंट और ऑपरेशन के बाद लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

कृष्णा का सफल इलाज एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर की संयुक्त विशेषज्ञता को दर्शाता है। सेंटर में बिहार और आसपास के क्षेत्रों से रेफर किए जाने वाले गंभीर रूप से घायल मरीजों को विशेषज्ञ और मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रॉमा केयर उपलब्ध कराया जाता है।

समय पर रेफरल ने बचाई जान

यह मामला गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद मरीज की समय पर पहचान, प्रारंभिक स्थिरीकरण और विशेषज्ञ ट्रॉमा सेंटर में जल्द रेफर किए जाने के महत्व को भी सामने लाता है। अंदरूनी रक्तस्राव वाले मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और उन्हें तत्काल सर्जिकल तथा क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ सकती है।

एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की ट्रॉमा सर्जरी और एनेस्थीसिया टीमों के समन्वित प्रयास से कृष्णा कुमार की जान बचाई जा सकी और करीब तीन सप्ताह के उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका।

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