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100 करोड़ की जमीन, पूर्व DG का कब्जा: अलीगंज में LDA कार्रवाई पर संशय, क्या पुलिस बैकआउट पर पूर्व अधिकारी का दबाव?

न्यूज डेस्क ,लखनऊ 

लखनऊ। राजधानी के पॉश इलाके अलीगंज (सेक्टर-एफ) में 100 करोड़ रुपये की कीमती सरकारी व आवंटित जमीनों पर अवैध कब्जे का मामला गरमा गया है। आरोप प्रदेश के एक सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक (DG) पर है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने आगामी 1 सितंबर को भारी बुलडोजर कार्रवाई की तारीख तय की थी, लेकिन ऐन मौके पर पुलिस प्रशासन द्वारा पर्याप्त बल उपलब्ध न कराए जाने की खबर ने इस पूरी मुहिम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सात भूखंडों का विवाद और 100 करोड़ का दांव

यह पूरा मामला अलीगंज के सेक्टर-एफ स्थित भूखंड संख्या C-32, C-33, C-34, C-35, D-19, D-20 और D-21 का है। LDA इन सभी सात प्लाटों को वैध आवंटियों के नाम आवंटित कर चुका है। कागजी तौर पर मालिकाना हक मिलने के बावजूद आवंटी अपनी ही जमीन पर कदम नहीं रख पा रहे हैं।

आवंटियों का सीधा आरोप है कि पूर्व DG अपने रसूख के दम पर इस पूरी 100 करोड़ की प्रॉपर्टी पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

1 सितंबर को होनी थी कार्रवाई, पुलिस बल से इनकार

LDA ने 1 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे अवैध कब्जा ध्वस्त करने की योजना बनाई थी। इसके लिए मजिस्ट्रेट, पीएसी और महिला पुलिस बल की मांग करते हुए संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया था।

LDA अपनी ओर से पूरी तैयारी में था, लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा ऐन वक्त पर फोर्स देने में असमर्थता जताने के बाद आवंटियों के होश उड़ गए हैं

अदालत का स्टे नहीं, फिर क्यों मेहरबान है खाकी?

आवंटियों के अनुसार, कब्जाधारक के पास हाईकोर्ट या किसी भी सक्षम अदालत से कोई स्थगन आदेश (Stay Order) नहीं है। पूर्व में भी कानूनी लड़ाई में आवंटी जीत चुके हैं।

इसके बावजूद पुलिस की ढिलाई यह साफ इशारा करती है कि अपने ही विभाग के पूर्व आलाधिकारी को बचाने के लिए खाकी हाथ पीछे खींच रही है। आवंटियों ने सवाल उठाया है कि अगर कब्जा करने वाला कोई आम नागरिक होता, तो क्या पुलिस इसी तरह पीछे हटती?

मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए आवंटियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का दरवाजा खटखटाया है।

शासन स्तर से निर्देश मिलने और LDA द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कार्रवाई अटक गई है। अब 1 सितंबर की तारीख पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि क्या शासन के सख्त रुख के बाद पुलिस बल मिलेगा या 100 करोड़ की जमीन पूर्व अधिकारी के रसूख की भेंट चढ़ जाएगी।

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