रिपोर्ट : प्रिया बाजपेयी शुक्ला
नौकरी बहाली की मांग को लेकर बुधवार दोपहर राजधानी लखनऊ में एंबुलेंस ड्राइवरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय पहुंचे और कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। अर्थी पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की तस्वीर लगाई गई थी, जिस पर ‘इस्तीफा दो’ लिखा हुआ था।
प्रदर्शन कर रहे एंबुलेंस ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें वर्ष 2021 में नौकरी से हटा दिया गया था। इसके बाद से वे लगातार रोजगार और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात मरीजों को एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई, लेकिन महामारी खत्म होने के बाद उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई एंबुलेंस ड्राइवरों को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें ईको गार्डन भेज दिया।
2021 में गई नौकरी, पांच साल से संघर्ष का दावा
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने लगातार अपनी सेवाएं दीं। कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आए और कुछ की जान भी चली गई। इसके बावजूद 2021 में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब पांच वर्षों से वे नौकरी बहाली और अपने अधिकारों के लिए अधिकारियों और सरकार के चक्कर लगा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी GVKEMRI पर भी गंभीर आरोप लगाए। कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी की ओर से कर्मचारियों का कथित तौर पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। उन्होंने वेतन से मेंटेनेंस के नाम पर पैसे काटने और विरोध करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के आरोप भी लगाए।
भर्ती के नाम पर पैसे लेने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने कंपनी पर भर्ती के नाम पर पैसे वसूलने का भी आरोप लगाया। शरद यादव ने दावा किया कि ड्राइवर पद के लिए 25 हजार रुपये और टेक्नीशियन पद के लिए 50 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। उनका आरोप है कि विरोध करने वाले हजारों कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वर्ष 2021 में करीब 3 हजार कर्मचारियों को हटाया गया था, जबकि अब तक करीब 9 हजार लोगों की नौकरी जाने का दावा किया जा रहा है। नौकरी छिनने के बाद कई कर्मचारी दूसरे छोटे-मोटे काम करके परिवार का खर्च चलाने को मजबूर हैं।
न्याय की गुहार लगाते-लगाते रो पड़े प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में पहुंचे अजय अपनी आपबीती बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में नौकरी जाने के बाद से वह लगातार न्याय के लिए अधिकारियों और सरकार के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के करीब 100 चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई।
अजय ने कहा कि कोरोना काल में उन्होंने और उनके साथियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा की। उनके मुताबिक, इस दौरान उनके करीब 100 साथियों की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है और शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही।
अपनी बात कहते-कहते अजय फफक-फफककर रो पड़े। उनके गले में कोरोना काल के दौरान मिला सम्मान का मेडल भी था। उन्होंने इसे अपने संघर्ष और उस दौर में दी गई सेवाओं की याद बताया।

सरकार से नौकरी बहाली की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से 2021 में हटाए गए एंबुलेंस कर्मचारियों की नौकरी बहाल करने, निजी कंपनी पर लगाए गए आरोपों की जांच कराने और कर्मचारियों के साथ न्याय करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब कोरोना महामारी के दौरान उनकी सेवाओं की जरूरत थी, तब उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से काम किया, लेकिन आज वही कर्मचारी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेजे जाने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर कर्मचारियों में चर्चा जारी है।
