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पटाखा लाइसेंस के बाद निरीक्षण न होने से बढ़ रहा हादसों का खतरा, मानकों की अनदेखी पर व्यापारी ने उठाए सवाल

लखनऊ। कौशांबी के मनोरी क्षेत्र में पटाखा निर्माण के दौरान हुई घटना के बाद लखनऊ में भी पटाखा कारोबार से जुड़े सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लखनऊ पटाखा संगठन के महामंत्री और पटाखा व्यापारी अखिलेश गुप्ता का कहना है कि इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। लाइसेंस जारी होने के बाद संबंधित स्थान का नियमित और प्रभावी निरीक्षण नहीं होने से सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खतरा बना रहता है।

अखिलेश गुप्ता के मुताबिक, कई जगह मानकों के विपरीत पटाखा निर्माण में प्रतिबंधित सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिक मुनाफा कमाने और लागत घटाने के प्रयास में सुरक्षा से समझौता किया जाता है, जो हादसों की बड़ी वजह बन सकता है।

उन्होंने बताया कि कई बार निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को पटाखा बनाने के काम में लगा दिया जाता है। उन्हें रासायनिक मिश्रण और सुरक्षा प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। ऐसे में मात्रा या प्रक्रिया में मामूली चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

अखिलेश गुप्ता ने कहा कि लखनऊ के प्रतिष्ठित पटाखा व्यापारी दीपावली के दौरान शिवाकाशी से आने वाले अधिकृत पटाखों की ही बिक्री करते हैं। प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार पटाखा गोदाम में स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन उपकरण, प्रवेश और निकास के पर्याप्त द्वार समेत जरूरी सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस परिसर के लिए लाइसेंस जारी किया गया है, उसी स्थान पर पटाखों का भंडारण और निर्धारित गतिविधियां होनी चाहिए। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस जारी करने के साथ-साथ मौके का नियमित निरीक्षण भी जरूरी है।

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