रिपोर्ट : दीपक अवस्थी
अजीतमल, औरैया। नारायणी वाटिका गेस्ट हाउस में जी हां बजरंग सेवा समिति, बाबरपुर-अजीतमल के द्वितीय वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सुंदरकांड पाठ, मानस प्रवचन और भोजन प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी लोगों ने कार्यक्रम में पहुंचकर आध्यात्मिक आयोजन का लाभ लिया।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों से समिति की ओर से प्रत्येक मंगलवार और विशेष अवसरों पर नियमित रूप से सुंदरकांड पाठ का आयोजन कराया जा रहा है। इसी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधि की निरंतरता में समिति का द्वितीय वार्षिकोत्सव आयोजित किया गया।
महंत देव नारायण दास जी महाराज का मिला सानिध्य
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री श्री अनंत श्री वैष्णव कुल पीठाधीश्वर पूज्य श्री महंत देव नारायण दास जी महाराज, गौरियापुर आश्रम, कानपुर देहात का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके सानिध्य से कार्यक्रम में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
वहीं मुख्य वक्ता मानस मनीषी श्री राम प्रपन्न दास जी महाराज, सेवानिवृत्त एडीएम, मुरैना (मध्य प्रदेश) ने मानस प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को रामभक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
‘भगवान भाव के भूखे हैं, भाव ही सब सार है’
मानस प्रवचन के दौरान श्री राम प्रपन्न दास जी महाराज ने शबरी प्रसंग और सुंदरकांड के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भाव ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुंदरकांड की चौपाई— “जामवंत के वचन सुहाए, सुन हनुमंत हृदय अति भाए”—का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी बुजुर्गों की बातों को सुने और उनके अनुभवों को अपने जीवन में धारण करे तो जीवन के कई पहलू बेहतर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं की ऊर्जा मिलकर समाज को सकारात्मक दिशा दे सकती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के श्रीचरणों में निरंतर समर्पित रहने और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
भोजन प्रसाद का हुआ वितरण
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी लोगों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर प्रसाद ग्रहण किया।
जी हां बजरंग सेवा समिति की ओर से बताया गया कि समिति अजीतमल क्षेत्र में नियमित सुंदरकांड पाठ और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
समिति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भावना के साथ समाज के हित और कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।
